नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के दौरान भारी मात्रा में कथित नकदी बरामद होने के मामले ने देशभर में सनसनी फैला दी है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका यह याचिका अधिवक्ता मैथ्यूज जे नेदुम्परा, हेमाली सुरेश कुर्ने, राजेश विष्णु आद्रेकर और चार्टर्ड अकाउंटेंट मंशा निमेश मेहता ने संयुक्त रूप से दायर की है। इसमें जस्टिस वर्मा के अलावा सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और इस मामले की जांच करने वाली न्यायाधीशों की समिति के सदस्यों को भी पक्षकार बनाया गया है।
दिल्ली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की मांग याचिका में दिल्ली पुलिस को न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश देने की अपील की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति को जांच करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत संज्ञेय अपराधों के दायरे में आता है।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर उठे सवाल याचिका में कहा गया है कि इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। पहले जहां आग के दौरान भारी मात्रा में नकदी मिलने की खबरें आई थीं, अब उन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा के स्पष्टीकरण और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर जनता के विश्वास को बनाए रखने की कोशिश की है।
14 मार्च को FIR क्यों नहीं हुई? याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि जब 14 मार्च को यह घटना हुई, तो उसी दिन एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बावजूद, इसे जब्त क्यों नहीं किया गया? कोई पंचनामा क्यों नहीं बनाया गया? आपराधिक जांच की प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हुई? इन सवालों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने किया ट्रांसफर की सिफारिश इस बीच, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े थे और 2021 में दिल्ली लाए गए थे।
जनता में आक्रोश, न्यायिक सुधारों की मांग इस घटनाक्रम के बाद न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छिड़ गई है। याचिका में मांग की गई है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़े कानून लागू किए जाएं और सरकार को ‘Judicial Standards and Accountability Bill, 2010’ जैसे कानून को पुनः लागू करने पर विचार करना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस जनहित याचिका पर क्या निर्णय लेता है और क्या न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होगी या नहीं।
