जैसलमेर के धोरों में लडकी बनकर लडके कर रहे डांस, पारंपरिक संस्कृति पर उठे सवाल

राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर खास पहचान रखने वाले जैसलमेर के धोरों में इन दिनों मनोरंजन के स्वरूप को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और कला विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पहले धोरों में पारंपरिक लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पर्यटकों को आकर्षित करती थीं, वहीं अब कुछ जगहों पर इस परंपरा से हटकर कार्यक्रम देखने को मिल रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में कुछ ट्रांसजेंडर कलाकार महिला वेशभूषा में मंचीय प्रस्तुतियां दे रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ प्रस्तुतियां लोक संस्कृति की मर्यादा से हटकर होती हैं, जिससे पारंपरिक पहचान पर असर पड़ रहा है। दर्शकों के बीच गलतफहमी की स्थिति भी बन जाती है, क्योंकि कई कलाकार अपनी प्रस्तुति शैली और पहनावे के कारण आसानी से पहचाने नहीं जा पाते।

स्थानीय कलाकारों का मानना है कि कालबेलिया और मरु लोक संस्कृति में अश्लीलता या आपत्तिजनक इशारों का कोई स्थान नहीं है। गुणसार लोक संगीत संस्थान के निदेशक बक्श खान का कहना है कि सभी ट्रांसजेंडर कलाकारों को एक ही नजर से देखना सही नहीं है। कई कलाकार अपनी मेहनत और हुनर से सम्मानजनक तरीके से कला की सेवा कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग इसे गलत दिशा में ले जा रहे हैं, जिससे पूरी परंपरा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चिकित्सकीय जानकारियों के अनुसार, लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया आसान या सस्ती नहीं होती। डॉक्टर नकुल सोमानी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में लगभग पांच लाख रुपये तक का खर्च आता है। हालांकि सरकारी योजनाओं के तहत सर्जरी के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिससे जरूरतमंद लोगों को राहत मिलती है।

पर्यटन सीजन और खासतौर पर न्यू ईयर के दौरान जैसलमेर में बड़ी संख्या में देश-विदेश से सैलानी पहुंचते हैं। इस दौरान धोरों और रिसॉर्ट्स में भीड़ बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ रिसॉर्ट्स में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आड़ में मर्यादा से परे गतिविधियां कराई जा रही हैं, जो जैसलमेर की समृद्ध विरासत के साथ न्याय नहीं करतीं।

इस पूरे मामले पर प्रशासन का कहना है कि कुछ शिकायतें सामने आई हैं, जिनके आधार पर संबंधित रिसॉर्ट प्रबंधन को हिदायत दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि बिना लाइसेंस शराब परोसने या नियमों का उल्लंघन करने की बात सामने आती है, तो पुलिस और आबकारी विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। अब सवाल यह है कि पर्यटन और परंपरा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि जैसलमेर की सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहे और कला से जुड़े सभी वर्गों को सम्मानजनक अवसर भी मिलें।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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