कैप्टन स्मित की बहादुरी पर बोले पिता, ‘उड़ान ही उसकी जिंदगी है’

फ्लाईदुबई विमान में कॉकपिट के अंदर सह-पायलट द्वारा किए गए जानलेवा हमले के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार की सूझबूझ और अदम्य साहस से बड़ा हादसा टल गया। सिर और हाथों में गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन स्मित ने न केवल खुद का बचाव किया, बल्कि विमान में सवार सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। इस अदम्य साहस के लिए गुजरात सरकार ने कैप्टन स्मित को ‘गुजरात गरिमा पुरस्कार’ देने की घोषणा की है।

‘ऐसी संकट की स्थिति के लिए नहीं मिलती विशेष ट्रेनिंग’

एनडीटीवी से बातचीत करते हुए कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र मच्छार ने बताया कि घटना की खबर सुनते ही पूरा परिवार सिहर उठा था। परिवार ने तुरंत मंदिर जाकर स्मित की सलामती की प्रार्थना की। “ऐसी खतरनाक और अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए कोई विशेष ट्रेनिंग नहीं होती। यह ईश्वर का आशीर्वाद और स्मित की आंतरिक शक्ति थी कि वह इस संकट का सामना कर सका।” — भूपेंद्र मच्छार (कैप्टन स्मित के पिता)

कैप्टन स्मित का फिलहाल अबू धाबी के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। हमले के कारण उनके सिर और दोनों हाथों में गंभीर चोटें आई हैं। सिर में कई टांके लगे हैं और डॉक्टरों के अनुसार उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में कुछ समय लगेगा।

कॉकपिट में हुआ हमला: जानिए कैसे बचाई यात्रियों की जान

 घटना के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने इमरजेंसी एक्स (कुल्हाड़ी) से कैप्टन स्मित पर अचानक हमला कर दिया। हमले के कारण विमान का नियंत्रण प्रभावित हुआ और वह तेजी से नीचे की ओर जाने लगा।अंतिम क्षणों में सूझबूझ: गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी। उन्हें एहसास हुआ कि तुरंत कदम नहीं उठाया गया तो कोई नहीं बचेगा। क्रू और यात्रियों को अलर्ट: उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर केबिन क्रू और यात्रियों को हमले की जानकारी दी। हमलावर पर काबू और सुरक्षित लैंडिंग: यात्रियों व क्रू मेंबर्स की मदद से हमलावर सह-पायलट को काबू में किया गया। इसके बाद विमान में सवार ‘ऑफ-ड्यूटी’ पायलटों की मदद से विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

‘उड़ान ही उसकी पत्नी जैसी है’

17 सालों से एविएशन सेक्टर में सेवा दे रहे कैप्टन स्मित के जुनून को याद करते हुए उनके पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “उड़ान ही उसकी पत्नी जैसी है। स्मित के लिए फ्लाइंग ही सब कुछ है।” उन्होंने बताया कि स्मित ने अपने करियर में सैकड़ों युवा पायलटों को मार्गदर्शन दिया है और हमेशा अपने काम को पूरी निष्ठा से अंजाम दिया है। पिता भूपेंद्र मच्छार ने कहा कि हालांकि पूरे देश और राज्य को स्मित की बहादुरी पर गर्व है, लेकिन इस वक्त परिवार (पत्नी और माता-पिता) के लिए सबसे पहली प्राथमिकता उनका पूरी तरह स्वस्थ होना है। स्वस्थ होते ही कैप्टन स्मित एक बार फिर से अपनी ड्यूटी पर लौटेंगे।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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