विदेशी वस्तुओं पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने की नीति अपनाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अदालत से करारा झटका लगा है। अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए इसे हटाने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने ट्रंप प्रशासन को 14 अक्टूबर तक का समय दिया है, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर
ट्रंप प्रशासन ने सत्ता में आने के बाद से कई देशों पर टैरिफ लगाए। इसका सबसे बड़ा असर चीन, यूरोप और एशियाई देशों से आयात पर पड़ा। जुलाई 2025 तक अमेरिका ने केवल टैरिफ से करीब 159 बिलियन डॉलर (लगभग 14 लाख करोड़ रुपये) जुटाए।
अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी टैरिफ को खारिज कर दिया तो यह रकम रिफंड करनी पड़ सकती है, जिससे अमेरिकी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा और अर्थव्यवस्था में झटके लग सकते हैं।
ट्रेड डील पर भी पड़ेगा असर
अमेरिका वर्तमान में कई देशों के साथ नए व्यापार समझौतों (Trade Deals) पर बातचीत कर रहा है। टैरिफ की वजह से ट्रंप प्रशासन इन वार्ताओं में दबाव बनाने में सफल हो रहा था। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट भी टैरिफ के खिलाफ फैसला देती है, तो अमेरिका की बातचीत की ताकत कमजोर हो सकती है और कई प्रस्तावित डील अटक सकती हैं।
ट्रंप का बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी टैरिफ को खारिज किया तो यह अमेरिका के लिए बर्बादी साबित होगा।” उन्होंने दावा किया कि टैरिफ से अमेरिका को फायदा हुआ है और यही आर्थिक मजबूती की कुंजी है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें 14 अक्टूबर पर टिकी हैं। तब तक टैरिफ लागू रहेंगे। ट्रंप प्रशासन इस बीच अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी तो टैरिफ जारी रह सकते हैं, लेकिन अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ गया तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।