CSIS की रिपोर्ट में खुलासा: कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ बना बड़ा सुरक्षा खतरा

कनाडा की सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने शुक्रवार को अपनी नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक की है, जिसमें देश के भीतर पनप रहे खालिस्तानी चरमपंथ को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की गई है। कनाडाई संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट में पहली बार स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि खालिस्तानी तत्व एक हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है।

हिंसक एजेंडे और फंडिंग पर बड़ा दावा

CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी न केवल हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं, बल्कि वे कनाडाई संस्थानों का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • संस्थानों का दुरुपयोग: चरमपंथी अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कनाडाई लोकतांत्रिक और सामाजिक संस्थानों का सहारा ले रहे हैं।

  • भ्रामक फंडिंग: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि समुदाय के अनभिज्ञ सदस्यों से परोपकार के नाम पर चंदा इकट्ठा किया जाता है, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों और चरमपंथ की ओर मोड़ दिया जाता है।

  • नागरिकों से संबंध: कई कट्टरपंथी तत्वों ने कनाडाई नागरिकों के साथ गहरे संबंध बना लिए हैं, जिससे उनकी पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

विदेशी हस्तक्षेप के आरोप: भारत, रूस और चीन निशाने पर

सुरक्षा एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में केवल आंतरिक खतरों का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक:

  1. जासूसी और हस्तक्षेप: भारत, रूस और चीन पर कनाडा की आंतरिक राजनीति में दखल देने के आरोप लगाए गए हैं।

  2. भारत पर आरोप: रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने राजनेताओं और पत्रकारों के माध्यम से कनाडा में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की, जिससे ‘बॉर्डर पार दमन’ (Transnational Repression) जैसी स्थितियां पैदा हुईं।

महत्वपूर्ण मोड़: हालांकि यह रिपोर्ट 2025 के खुफिया आकलन पर आधारित है, लेकिन वर्तमान में कनाडाई अधिकारियों का यह भी मानना है कि मौजूदा हिंसक अपराधों में भारत की सीधी संलिप्तता के सबूत नहीं हैं।

भारत का कड़ा रुख

भारत सरकार ने CSIS द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दावों को “पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और आधारहीन” करार दिया है। भारत लगातार कनाडा पर यह दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी धरती से संचालित होने वाले भारत विरोधी चरमपंथी तत्वों पर लगाम लगाए।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment