आकाश-NG की ताकत बढ़ी: 50 किमी रेंज के साथ DRDO की स्वदेशी मिसाइल ने रचा नया कीर्तिमान

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा हालात के बीच भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में डीआरडीओ की स्वदेशी वायु रक्षा मिसाइल आकाश-नेक्स्ट जेनरेशन (Akash-NG) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। आकाश-NG की मारक क्षमता बढ़कर 50 किलोमीटर हो गई है, यानी अब यह मिसाइल 50 किमी दूर तक हवाई लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम है।

डुअल-पल्स मोटर से मिला बड़ा अपग्रेड

डीआरडीओ के मुताबिक, आकाश-NG की रेंज में यह बढ़ोतरी नई डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर की सफल टेस्टिंग के बाद संभव हुई है। आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकाथी राजू ने बताया कि यह तकनीक मिसाइल को दो अलग-अलग चरणों में थ्रस्ट देती है, जिससे उड़ान के दौरान बेहतर नियंत्रण, अधिक गति और उच्च सटीकता मिलती है। इसके साथ ही, नई पीढ़ी की आकाश-NG मिसाइलें रडार पर पकड़ में आना भी कठिन बन गई हैं।

पहले रैमजेट, अब डुअल-पल्स तकनीक

पहले की आकाश मिसाइलों में रैमजेट इंजन का इस्तेमाल होता था। लेकिन नई आकाश-NG में डुअल-पल्स मोटर ने प्रोपल्शन सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया है। ARDE अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव तेज़ रफ्तार और अंतिम चरण में बेहतर मैन्यूवरिंग सुनिश्चित करता है—यानी लक्ष्य बच भी निकले, तो मिसाइल पीछा कर सकती है।

क्यों खास है 50 किमी रेंज

रेंज में इजाफे के साथ आकाश-NG अब फाइटर जेट्स, क्रूज़ मिसाइल्स और हाई-स्पीड ड्रोन्स जैसे चुनौतीपूर्ण हवाई खतरों को भी प्रभावी ढंग से निशाना बना सकती है। ये वे लक्ष्य हैं, जिन्हें पुराने एयर डिफेंस सिस्टम अक्सर ट्रैक करने में चूक जाते थे। बेहतर प्रोपल्शन और गाइडेंस के चलते यह सिस्टम सीमावर्ती इलाकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करता है।

परीक्षण में दिखी ताकत

हालिया परीक्षण के दौरान आकाश-NG ने 50 किलोमीटर की पूरी रेंज पर एक तेज़ रफ्तार बंशी (Banshee) पायलटलेस टारगेट एयरक्राफ्ट को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट किया। बंशी ड्रोन का उपयोग आमतौर पर लो-लेवल उड़ने वाली क्रूज़ मिसाइलों और UAVs जैसे मुश्किल लक्ष्यों की नकल के लिए किया जाता है—इससे सिस्टम की विश्वसनीयता और बढ़ जाती है।

आकाश-NG की प्रमुख खूबियां

  • 50 किमी तक प्रभावी मारक क्षमता

  • Surface-to-Air Missile (SAM) बैटरियों के साथ एकीकृत मजबूत एयर डिफेंस

  • लो-ऑब्ज़र्वेबल प्रोफाइल, जिससे रडार पर पकड़ मुश्किल

  • सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण ठिकानों की बेहतर सुरक्षा

कुल मिलाकर, आकाश-NG में यह उन्नयन भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देता है और बदलते हवाई खतरों के बीच देश की सुरक्षा तैयारियों को और पुख्ता करता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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