नई दिल्ली: चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर देश की सियासत में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। इसी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और सरकार उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं करती, तो विपक्ष संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने जैसे कदम पर विचार कर सकता है।
राहुल गांधी की मांग का कांग्रेस सांसद ने किया समर्थन
मल्लू रवि ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से संसद में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक विपक्ष ने भी लगातार इन विषयों को संसद में उठाया, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं मिला। कांग्रेस सांसद ने कहा कि अब चुनाव आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और सरकार को इस मामले में जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मल्लू रवि के मुताबिक, अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार को उन्हें पद से हटाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसा नहीं होने पर राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल संसद में आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और जारी आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता डेटा से जुड़े कुछ फैसलों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे या पद से हटाने की मांग तेज कर दी। वहीं चुनाव आयोग की ओर से इन घटनाओं को इस तरह की आंतरिक असहमति के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। आयोग के सूत्रों ने कहा है कि SIR समेत फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में भी जांच की मांग
इस बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका में चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कथित एकतरफा फैसलों की स्वतंत्र जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। याचिका में SIR और चुनावी डेटा से जुड़े फैसलों की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, ये याचिका में लगाए गए आरोप और मांगी गई राहत हैं, इन्हें अदालत का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
बीजेपी ने चुनाव आयोग का किया बचाव
दूसरी ओर, बीजेपी ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने SIR को लेकर विपक्ष पर लोगों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और निष्पक्ष संस्था है तथा चुनावों के समय उस पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।
सरावगी ने यह भी कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव सामने आ सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आम सहमति से लिया जाता है। उनका कहना है कि विपक्ष को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
अब आगे क्या?
SIR को लेकर विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां CEC के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं बीजेपी और चुनाव आयोग इन आरोपों को अलग नजरिए से देख रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर होने वाली कार्यवाही पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








