रायपुर में खेले गए दूसरे एकदिवसीय मैच में भारत को ऐसी हार झेलनी पड़ी जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद थी। भारत की शुरुआत अच्छी रही नहीं, लेकिन फिर विराट कोहली और रुतुराज गायकवाड़ ने शानदार बल्लेबाजी की और टीम का स्कोर 358 तक पहुंचाया। कोहली और गायकवाड़ ने टीम को मजबूत स्थिति दी और अंत में केएल राहुल की नाबाद 66 रनों की पारी ने भारत को एक विशाल कुल तक पहुँचाया।
भारत का यह विशाल स्कोर किसी को उम्मीद से पीछे नहीं था — लेकिन तब जब प्रत्युत्तर में साउथ अफ्रीका की टीम ने शुरुआत तो धीमी की, लेकिन एडेन मार्करम ने ज़िम्मेदारी लेते हुए जोरदार पारी खेली। मार्करम ने शतक जड़कर विपक्षी गेंदबाज़ी पर दबाव बना दिया। इसके बाद मैथ्यू ब्रीट्ज़के और डेवाल्ड ब्रेविस ने गति बरकरार रखते हुए मैच को भारत के लिए मुश्किल बना दिया। अंततः 4 विकेट से जीत हासिल करके साउथ अफ्रीका ने मैच जीता और सीरीज 1-1 से बराबर की।
इस हार के बाद यह साफ दिखा कि सिर्फ मजबूत बल्लेबाज़ी से मैच नहीं जीता जा सकता। भारत की गेंदबाज़ी, खासकर डेथ ओवरों में, दबाव में विकेट नहीं ले सकी और रन दी हुई। टीम में ऐसा गेंदबाज़ी आक्रमण न होना, जिसके पास मैच जिताने की क्षमता हो, भारत के लिए भारी साबित हुआ। इसके साथ ही टीम प्रबंधन की रणनीति पर भी सवाल उठने लगे — कहीं ऐसा नहीं कि बल्लेबाज़ी और ऑल-राउंडर पर ज़्यादा भरोसा जीत की संभावनाओं को कम कर रहा हो।
अब तीन मैचों की सीरीज का फैसला तीसरे और अंतिम वनडे में होगा। भारत के पास मौका है कि वह गेंदबाज़ी, रणनीति और मानसिक संतुलन के साथ वापसी करे। दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास लेकर मैदान पर उतर रही है।
कुल मिलाकर, दूसरे वनडे ने एक बार फिर दिखा दिया कि क्रिकेट में सिर्फ रनों का पहाड़ बनाना काफी नहीं — उन्हें बचाना, ठीक रणनीति और संतुलन के साथ खेलना भी ज़रूरी है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







