पोकरण जासूसी कांड: आईएसआई जासूस झबराराम 5 दिन के रिमांड पर, हनीट्रैप से खुली देशद्रोह की परतें

जयपुर। राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के पोकरण से सामने आए जासूसी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। जासूसी के आरोप में गिरफ्तार झबराराम को शनिवार को राजस्थान पुलिस की सीआईडी इंटेलिजेंस ने जयपुर की अदालत में पेश किया, जहां से उसे 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब सीआईडी इंटेलिजेंस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की संयुक्त टीमें आरोपी से गहन पूछताछ करेंगी।

जानकारी के मुताबिक, राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने 25 जनवरी को पोकरण क्षेत्र के नेवार गांव निवासी झबराराम को हिरासत में लिया था। कई दिनों तक चली पूछताछ के दौरान सामने आए गंभीर खुलासों के बाद शुक्रवार को उसे औपचारिक रूप से आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

हनीट्रैप के जाल में फंसा, पैसों के बदले बेची देश की सुरक्षा

पूछताछ में सामने आया है कि झबराराम को पाकिस्तानी महिला हैंडलर ने पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में लिया। मीठी-मीठी बातों और भावनात्मक जुड़ाव के बाद उसे हनीट्रैप में फंसाया गया। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट्स ने मोटी रकम का लालच देकर उससे भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हासिल कीं।

मोबाइल से मिले अहम सबूत

जांच एजेंसियों को आरोपी के मोबाइल फोन से आईएसआई हैंडलर्स के साथ चैट, फोटो और अन्य डिजिटल सबूत मिले हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि झबराराम को एक-एक सूचना भेजने पर 5 से 10 हजार रुपये तक मिलते थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि आरोपी ने अपनी सिम पर आने वाले ओटीपी भी पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ साझा किए, जिसके बाद उसका व्हाट्सएप अकाउंट सीधे आईएसआई एजेंट्स द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था।

कौन है झबराराम?

जासूसी के आरोप में पकड़ा गया झबराराम पोकरण तहसील के नेवार गांव का निवासी है। वह ई-मित्र संचालक के रूप में काम करता था और साथ ही शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था। जांच में सामने आया है कि वह करीब दो साल से लालच में आकर भारतीय सेना की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को भेज रहा था।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

इस मामले के सामने आने के बाद राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। रिमांड के दौरान एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि

  • झबराराम के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे

  • उसने कितनी और किस स्तर की सैन्य जानकारियां साझा कीं

  • क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया और हनीट्रैप के जरिए देश की सुरक्षा को कैसे निशाना बनाया जा रहा है, और ऐसे मामलों में सतर्कता कितनी जरूरी है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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