जयपुर। राजस्थान कांग्रेस ने हाल ही में छह नेताओं – मेवाराम जैन, बालेंदु सिंह शेखावत, संदीप शर्मा, बलराम यादव, अरविंद डामोर और तेजपाल मिर्धा – के निलंबन को रद्द कर उन्हें पार्टी में वापस शामिल कर लिया है। इन नेताओं को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में पहले निलंबित किया गया था।
गहलोत-पायलट खेमों में संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की गई है। हालांकि, कुछ नेताओं की वापसी पर पार्टी के अंदर विरोध भी उभर रहा है, जिससे गुटबाजी की संभावना बढ़ गई है।
किन नेताओं की हुई वापसी
एआईसीसी के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने छह नेताओं का निष्कासन रद्द करने का आदेश जारी किया। इनमें से कुछ नेता गहलोत खेमे से जुड़े हैं, जबकि कुछ पायलट समर्थक माने जाते हैं। निलंबन के पीछे कारणों में अनैतिक आचरण, पार्टी आदेशों की अवहेलना और पार्टी विरोधी गतिविधियां शामिल थीं।
मेवाराम जैन की वापसी का विवाद
इन छह नेताओं में बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन की वापसी को सबसे ज्यादा विवादित माना जा रहा है। जनवरी 2024 में उनके खिलाफ जोधपुर के राजीव नगर थाने में एक विवाहिता ने रेप का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद कथित अश्लील वीडियो वायरल होने पर डोटासरा ने उन्हें पार्टी से निलंबित किया था। निलंबन पत्र में कहा गया था कि मेवाराम का आचरण पार्टी संविधान के खिलाफ है।
मेवाराम जैन अशोक गहलोत के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार बाड़मेर से विधानसभा चुनाव जीता था। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में वे 13,337 वोटों से हार गए थे। इस फैसले से प्रदेश कांग्रेस में सियासी हलचल बढ़ गई है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों खेमों के बीच संतुलन कैसे बना रहता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







