जयपुर: राजस्थान में नगर निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और उन्हें अपने खेमे में बनाए रखने की कोशिशों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि कई शहरों में पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर गुरुवार को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बानसूर, फतहनगर, उदयपुर, अलवर, बीकानेर, कुचेरा, डेगाना और देवली-उनियारा सहित कई स्थानों पर पार्षदों पर कथित दबाव का मुद्दा उठाया।
डोटासरा ने सरकार को दी चेतावनी
सीकर में मीडिया से बातचीत के दौरान डोटासरा ने आरोप लगाया कि पालिका चेयरमैन और अन्य निकाय पदों के चुनाव से पहले सरकार की ओर से पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी गतिविधियां नहीं रुकीं तो लोगों में आक्रोश बढ़ सकता है। डोटासरा ने यह भी कहा कि यदि इस दौरान कोई गंभीर हिंसक घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की होगी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
हालांकि, भाजपा की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया गया है। इससे पहले भाजपा नेता कालीचरण सराफ ने डोटासरा के ऐसे आरोपों को नकारते हुए किसी तरह के गलत आचरण से इनकार किया था।
बीकानेर में पार्षदों की बाड़ेबंदी पर विवाद
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पार्षदों को जैसलमेर के एक होटल में ठहराए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गुरुवार सुबह कुछ सीआईडी कर्मी होटल पहुंचे और पार्षदों की संख्या की जानकारी ली। हालांकि, इस दावे को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। बीकानेर में कांग्रेस के बागी उम्मीदवार नवरतन डागा ने मेयर पद के चुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके बाद कांग्रेस के अनिल कल्ला और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच मुकाबला रह गया है।
भरतपुर में भाजपा प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन
भरतपुर नगर निगम में महापौर पद का चुनाव भी राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहा। निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह ने 18 सितंबर को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी अनुराधा सिंह के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नामांकन वापसी से पहले विचित्रा सिंह के पति और पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट के होटल में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही। पार्टी ने इसे दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नामांकन वापस लेने का फैसला विकास से जुड़े कारणों से लिया गया था।
बानसूर और फतहनगर में भी कांग्रेस ने लगाए आरोप
कांग्रेस ने बानसूर में पार्टी के कैंप में पुलिस के बार-बार पहुंचने और पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इसी तरह फतहनगर में निर्दलीय चेयरमैन प्रत्याशी ममता चपलोत के घर अवैध निर्माण का नोटिस दिए जाने को भी कांग्रेस ने कथित दबाव की कार्रवाई बताया। पार्टी ने उदयपुर, अलवर, कुचेरा, डेगाना और देवली-उनियारा समेत अन्य निकाय क्षेत्रों में भी ऐसे ही आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की ओर से पुलिस अधीक्षकों को दिए गए ज्ञापनों में पार्षदों को डराने-धमकाने और उन्हें जबरन ले जाने की आशंका जताई गई है।
21 सितंबर को होंगे महापौर और सभापति के चुनाव
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के बाद अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव होने हैं। राज्य की 10 नगर निगमों सहित विभिन्न नगरीय निकायों में इन पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महापौर पदों के लिए चुनाव 21 सितंबर को निर्धारित हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
राजस्थान के निकाय चुनावों के इस चरण में कांग्रेस के आरोपों और भाजपा के इनकार के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में महापौर और सभापति चुनाव के दौरान होने वाले मतदान से ही स्पष्ट होगा कि अलग-अलग निकायों में किस दल या समूह को बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक समर्थन मिलता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







