WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीय यूजर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियमों को लागू करने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब यह बाध्यता साल 2026 के अंत तक लागू नहीं होगी और नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
क्या है सिम बाइंडिंग का नियम?
सिम बाइंडिंग के तहत सरकार का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है। इस नियम के लागू होने के बाद:
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सिम कार्ड अनिवार्य: फोन में एक्टिव सिम कार्ड के बिना WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स काम नहीं करेंगे।
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मल्टी-डिवाइस पर पाबंदी: यदि कोई यूजर अपने अकाउंट को कंप्यूटर या अन्य डिवाइस पर लॉग-इन करता है, तो वह बिना सिम वाले प्राइमरी डिवाइस पर केवल 6 घंटे तक ही सक्रिय रह पाएगा, जिसके बाद वह स्वतः लॉग-आउट हो जाएगा।
क्यों बढ़ाई गई समय सीमा?
पिछले साल नवंबर में जारी इन निर्देशों के बाद Meta (WhatsApp की पैरेंट कंपनी) और Apple जैसी दिग्गज टेक कंपनियों ने सरकार के सामने तकनीकी चुनौतियों का हवाला दिया था। कंपनियों का कहना था कि उनके मौजूदा इकोसिस्टम और डिवाइस आर्किटेक्चर में इस बदलाव को तुरंत लागू करना तकनीकी रूप से जटिल है। उद्योग जगत की मांग और तकनीकी तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत को देखते हुए दूरसंचार विभाग (DoT) ने इसे लागू करने की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
साइबर फ्रॉड पर कसना है शिकंजा
सरकार का मानना है कि वर्तमान में बिना सिम कार्ड के भी कई मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाकर देश के बाहर से फ्रॉड जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। सिम बाइंडिंग अनिवार्य होने से:
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पहचान की पुष्टि: हर मैसेजिंग ऐप सीधे तौर पर मोबाइल नंबर और सिम से जुड़ जाएगा।
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क्राइम पर लगाम: अपराधियों के लिए बिना वैध सिम के अकाउंट चलाना लगभग असंभव हो जाएगा, जिससे साइबर अपराधों में कमी आने की उम्मीद है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







