तमिलनाडु में ‘विजय’ सुनामी: कोलाथुर में एमके स्टालिन की ऐतिहासिक हार, थलपति विजय की TVK ने ढहाया DMK का किला

तमिलनाडु की राजनीति में आज वह दिन आया है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। द्रविड़ राजनीति के अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने स्टालिन को करीब 9,121 वोटों के अंतर से हराकर राज्य की सियासत में ‘महा-उलटफेर’ कर दिया है।

कोलाथुर का नतीजा: 15 साल का वर्चस्व खत्म

कोलाथुर सीट, जो 2011 में परिसीमन के बाद वजूद में आई थी, वहां से स्टालिन लगातार तीन बार (2011, 2016, 2021) जीत दर्ज कर चुके थे। 2021 में उन्होंने यहाँ 70,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी।  वीएस बाबू को 82,997 वोट मिले, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को 74,202 वोटों से संतोष करना पड़ा।  स्टालिन अब तमिलनाडु के उन मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें अपनी ही सीट गंवानी पड़ी (1967 में एम. भक्तवत्सलम और 1996 में जयललिता के बाद)।

कौन हैं वीएस बाबू? जिन्होंने ‘चाणक्य’ को मात दी

वीएस बाबू कभी एमके स्टालिन के ही करीबी सहयोगी हुआ करते थे। DMK से नाता: 2006 में उन्होंने DMK के टिकट पर पुरसईवल्कम से चुनाव जीता था। बगावत की वजह: पार्टी में पीके सेकरबाबू के बढ़ते प्रभाव के चलते उन्हें किनारे कर दिया गया था। इसके बाद वे AIADMK में गए और अंततः विजय की TVK में शामिल होकर अपने पुराने ‘गुरु’ को ही चुनौती दी और जीत हासिल की।

TVK का उभार: 100 सीटों के पार पहुंची विजय की पार्टी

तमिलनाडु चुनाव के रुझानों ने राज्य के 50 साल पुराने द्रविड़ मॉडल (DMK बनाम AIADMK) को हिला कर रख दिया है। रुझान: थलपति विजय की पार्टी TVK 108 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और बहुमत के जादुई आंकड़े (118) के बेहद करीब है। प्रमुख हार: न केवल स्टालिन, बल्कि DMK सरकार के कई दिग्गज मंत्री जैसे गीता जीवन (थूथुकुडी) भी चुनाव हार गए हैं।

सियासी समीकरण: क्या बदलेगा तमिलनाडु का भविष्य?

इस जीत के साथ थलपति विजय की TVK राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। विजय खुद पेरम्बूर और त्रिची दोनों सीटों से आरामदायक बढ़त बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘सनातन धर्म’ विवाद और सत्ता विरोधी लहर ने TVK के ‘तीसरे विकल्प’ को ऑक्सीजन दी है। “यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं है, बल्कि तमिलनाडु में एक नए युग की शुरुआत है।” — प्रशांत किशोर (पूर्व चुनावी रणनीतिकार, जिन्होंने विजय की जीत की भविष्यवाणी की थी)

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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