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राजस्थान भाजपा की अहम बैठक: हारे हुए नेताओं ने सुनाई पीड़ा, प्रदेश अध्यक्ष ने सुनवाई के लिए महामंत्री नियुक्त करने का किया ऐलान

जयपुर | 29 जून 2025 राजस्थान में भाजपा संगठन और सत्ता के बीच सामंजस्य को लेकर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। शनिवार को जयपुर के एक होटल में भाजपा ने हारे हुए सांसदों, विधायक प्रत्याशियों और पूर्व सांसद-विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में बड़ी संख्या में नेताओं ने हिस्सा लिया और अपनी उपेक्षा की पीड़ा खुलकर प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल और प्रदेश अध्यक्ष मदन दिलावर राठौड़ के समक्ष रखी।

नेताओं ने बयां की नाराजगी

बैठक में मौजूद अधिकांश नेता इस बात को लेकर आक्रोशित नजर आए कि सरकार बनने के बाद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। एक नेता ने तंज कसते हुए कहा कि “जिन्हें मंत्री बनाया गया है, उनके सरकारी आवास के दरवाजे सुबह 10 बजे तक भी नहीं खुलते। जब हमारी सुनवाई नहीं हो रही तो आम जनता और कार्यकर्ताओं की क्या होगी?” जयपुर जिले के एक पूर्व विधायक ने यहां तक कहा कि उनके खेत से जुड़ा एक छोटा सा सरकारी कार्य तक नहीं हो पाया, जबकि वे कई बार अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं।

नौकरशाही पर भी उठे सवाल

बैठक में नेताओं ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि नौकरशाही इतनी हावी हो गई है कि हारने वाले नेताओं की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यह पार्टी के अंदर समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा रहा है।

प्रमुख नेताओं की मौजूदगी

बैठक में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी, पूर्व सांसद जसकौर मीणा, रामलाल शर्मा, नरपत सिंह राजवी, बिहारीलाल विश्नोई, सुरेन्द्र पारीक, शैतान सिंह, और अभिनेश महर्षि सहित कई बड़े नेता शामिल रहे। इन सभी ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और प्रशासनिक उपेक्षा की घटनाएं साझा कीं।

महामंत्री की नियुक्ति का ऐलान

बैठक में आए फीडबैक को गंभीरता से लेते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने घोषणा की कि पार्टी एक प्रदेश महामंत्री की नियुक्ति करेगी जो संगठन और सत्ता के बीच सेतु का कार्य करेगा। यह महामंत्री कार्यकर्ताओं द्वारा सुझाए गए जनहित के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाएगा और उनके त्वरित समाधान की निगरानी करेगा।

कार्यकर्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता: अग्रवाल

प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसमें सत्ता और संगठन के बीच स्पष्ट समन्वय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और उनकी बातों को अनदेखा नहीं किया जाएगा।

यह बैठक भाजपा के भीतर चल रही असंतोष की आहट को उजागर करती है, लेकिन साथ ही यह भी दर्शाती है कि पार्टी नेतृत्व अब इस असंतोष को समझते हुए संवाद और समाधान की पहल कर रहा है। आने वाले समय में देखना होगा कि इस बैठक के नतीजे जमीनी स्तर पर क्या असर डालते हैं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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