प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी एनडीए सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश करेगी। यह बिल दोपहर 12 बजे सदन में रखा जाएगा, जिसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस की उम्मीद है। अधिकतर मुस्लिम संगठनों के विरोध के बावजूद सरकार इस बिल को पारित कराने के लिए दृढ़ नजर आ रही है।
सहयोगी दलों पर नजर, टीडीपी ने दिया समर्थन
इस बिल को लेकर भाजपा के सहयोगी दलों तेलुगू देशम पार्टी (TDP), जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के रुख पर सबकी नजर टिकी हुई है। हालांकि, TDP ने बिल के समर्थन की घोषणा कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने कहा कि “वक्फ भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए यह बिल आवश्यक है। हम मुस्लिम हितों की रक्षा करेंगे, लेकिन अगर यह बिल सही दिशा में है तो हमारा समर्थन रहेगा।” वहीं, JDU ने अभी तक स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि “हमारे सांसदों ने मुस्लिम संगठनों की चिंताओं को संसदीय समिति के सामने रखा है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे सुझावों को शामिल करेगी।”
विपक्ष का विरोध, ओवैसी ने कहा – “वक्फ बर्बाद बिल”
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ इस बिल का जमकर विरोध कर रहा है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “वक्फ बर्बाद बिल” बताते हुए आरोप लगाया कि “सरकार का मकसद मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर करना है।” कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने भी बिल को “मुस्लिम विरोधी” बताया और कहा कि “यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास है।”
भाजपा और कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है। वहीं, कांग्रेस ने भी अपने सदस्यों के लिए तीन दिन का व्हिप जारी कर दिया है, ताकि विधेयक पर जोरदार बहस की जा सके।
क्या है वक्फ संशोधन बिल?
इस बिल का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को सशक्त बनाना है। सरकार का दावा है कि इससे वक्फ बोर्डों को अधिक अधिकार मिलेंगे, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाएगा।
लोकसभा में अंकगणित
- कुल सदस्य: 542 (एक रिक्त)
- बहुमत: 272
- एनडीए के पास: 293 सीटें (भाजपा-240, TDP-16, JDU-12, शिवसेना-7, LJP-5)
- इंडिया ब्लॉक: 234 सीटें (कांग्रेस-99, सपा-37, टीएमसी-28)
ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार को इस बिल को पारित कराने में आसानी होगी, लेकिन विपक्षी हंगामे के चलते सदन में गरमागरम बहस होने की संभावना है।
आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।