बंगाल चुनाव से पहले ED का बड़ा एक्शन: ममता बनर्जी के करीबी पुलिस अधिकारी और कारोबारी के ठिकानों पर छापेमारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक चार दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में भारी हलचल मचा दी है। रविवार सुबह-सुबह जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (DC) शांतनु सिन्हा और रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई ने चुनाव से ऐन पहले राज्य के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ से जुड़े हैं तार

ED की यह कार्रवाई दक्षिण कोलकाता के बालीगंज इलाके में चर्चित ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ केस से जुड़ी बताई जा रही है।  रविवार सुबह करीब 7 बजे ED की टीम बालीगंज के फर्न रोड स्थित शांतनु सिन्हा के आवास पर पहुँची। शांतनु सिन्हा पहले कालीघाट थाने के प्रभारी रह चुके हैं, जो मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र (भवानीपुर) है। बेहाला स्थित कारोबारी जॉय कामदार के घर जब टीम पहुँची, तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया। कई बार चेतावनी देने के बाद टीम को अंदर प्रवेश मिला।

बेहाला में कारोबारी के घर मिला कैश

सूत्रों के अनुसार, रियल एस्टेट प्रमोटर जॉय कामदार के बेहाला स्थित आवास पर तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी (Cash) बरामद की गई है। जॉय कामदार को ED ने पहले भी दो बार समन भेजा था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे। उनका नाम मुख्य आरोपी सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार के करीबियों में सामने आया था। गौरतलब है कि मुख्य आरोपी सोना पप्पू सोशल मीडिया पर लाइव आने के बावजूद अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

एजेंसियों के रडार पर ‘सिंडिकेट’ और ‘घोटाले’

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय एजेंसियां बेहद सक्रिय हैं:

  1. शिक्षक भर्ती घोटाला: पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी पहले ही इस मामले में घिरे हुए हैं।

  2. IT की रेड: हाल ही में आयकर विभाग ने टीएमसी नेता देबाशीष कुमार के घर पर भी दबिश दी थी।

  3. अवैध निर्माण: शहर में सिंडिकेट और अवैध निर्माण को लेकर कई IPS अधिकारियों से भी पूछताछ की जा चुकी है।

चुनावी रण और जांच की आंच

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में मतदान होना है। चुनाव से ठीक पहले हुई इस छापेमारी को सत्ताधारी दल TMC ‘राजनैतिक प्रतिशोध’ बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘भ्रष्टाचार का अंत’ करार दे रहा है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इन जांचों का परिणाम मतदाताओं के मूड को प्रभावित कर सकता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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