गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पूर्व एसपी अमित कुमार और अन्य 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) स्वप्न आनंद की अदालत के आदेश पर की गई है। आरोपियों पर वसूली, अपहरण, धोखाधड़ी, अवैध हिरासत और हत्या के प्रयास जैसे अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत और आरोपों की शुरुआत
वाराणसी के भुल्लनपुर निवासी और बर्खास्त सिपाही अनिल सिंह ने वर्ष 2022 में CJM की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि चंदौली के तत्कालीन एसपी अमित कुमार और उनकी टीम जनता से हर महीने ₹12.50 लाख की वसूली कर रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने इन अनियमितताओं को उजागर किया, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया और फर्जी मामले में फंसाने की साजिश रची गई।
अवैध हिरासत और अपहरण के आरोप
अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि 5 सितंबर 2021 को सफेद रंग की बिना नंबर प्लेट की बोलेरो गाड़ी में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उनके गाजीपुर स्थित ससुराल पहुंचे और उनका अपहरण किया। आरोप है कि अनिल सिंह को दो दिन तक अवैध हिरासत में रखा गया और झूठे दस्तावेज तैयार किए गए। 7 सितंबर 2021 को उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश
अनिल सिंह ने इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अधिकारियों की संलिप्तता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा। इसके बाद उन्होंने CJM की अदालत का रुख किया। अदालत ने 21 सितंबर 2024 को पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच के आदेश दिए।
कानूनी लड़ाई और पुलिस की देरी
अनिल सिंह ने इस मामले में उच्च न्यायालय तक का रुख किया। हाई कोर्ट ने पुलिस को 28 नवंबर 2024 से पहले एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद, 27 नवंबर की रात 12:22 बजे गाजीपुर के नंदगंज थाने में पूर्व एसपी अमित कुमार समेत 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
क्या हैं आरोप?
मुकदमे में पूर्व एसपी अमित कुमार, स्वाट टीम प्रभारी राजीव कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी अजीत कुमार सिंह, बबुरी थाना अध्यक्ष सत्येंद्र विक्रम सिंह समेत अन्य पर वसूली, अपहरण, धोखाधड़ी और हत्या के प्रयास के आरोप शामिल हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप
अनिल सिंह के अनुसार, तत्कालीन एसपी और उनकी टीम मुगलसराय थाना क्षेत्र में हर महीने जनता से गैरकानूनी तरीके से वसूली करते थे। अनिल ने यह वसूली सूची सोशल मीडिया पर वायरल कर दी थी, जिसके बाद हड़कंप मच गया। डीआईजी विजिलेंस लव कुमार द्वारा मामले की जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।
अभी क्या स्थिति है?
अदालत के आदेश पर दर्ज हुए इस मुकदमे ने पुलिस प्रशासन में हलचल मचा दी है। मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की उम्मीद है। यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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