राजस्थान BJP विधायक कंवरलाल मीणा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक

राजस्थान की राजनीति में बड़ा मोड़ आया है। अंता से बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2005 में SDM पर रिवॉल्वर तानने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई तीन साल की सजा और आत्मसमर्पण के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इससे अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है।

क्या था मामला?

यह मामला दो दशक पुराना है। साल 2005 में विधायक कंवरलाल मीणा और तत्कालीन SDM रामनिवास मेहता के बीच तीखी बहस के दौरान मीणा पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी रिवॉल्वर SDM की कनपटी पर तान दी और जान से मारने की धमकी दी। इसके साथ ही घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे वीडियोग्राफर की रिकॉर्डिंग भी तोड़ दी गई थी।

हालांकि, साल 2018 में एसीजेएम कोर्ट, मनोहरथाना ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन मामला अपील में एडीजे कोर्ट पहुंचा, जहां 2023 में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन वहां भी सजा बरकरार रही और विधायक को आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

विधायक मीणा ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनकी पैरवी फौजदारी मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता नमित सक्सेना ने की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के सरेंडर आदेश पर स्थगन लगा दिया, जिससे मीणा को फिलहाल आत्मसमर्पण नहीं करना होगा।

कांग्रेस का विरोध, सदस्यता रद्द करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से पहले कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक हमला बोला। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा सचिवालय को ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने मांग की कि तीन साल की सजा पाए विधायक की सदस्यता तुरंत रद्द की जाए। डोटासरा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अब आगे क्या?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक से विधायक कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता बच गई है। लेकिन उनके खिलाफ कोर्ट की टिप्पणियों और आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते राजनीतिक दबाव बना रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक जनप्रतिनिधि से कानून का पालन करवाने की अपेक्षा होती है, लेकिन मीणा ने स्वयं कानून का उल्लंघन किया। अब देखना होगा कि इस मामले में अंतिम फैसला क्या आता है और इसका राजस्थान की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। क्या आप इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया या विशेषज्ञ की राय भी शामिल करना चाहेंगे?

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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