ईरान-इजरायल युद्ध: ट्रंप ने दिए ‘सीजफायर’ के संकेत, क्या मई तक थमेगी जंग?

वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच विश्व के लिए राहत की एक खबर सामने आ रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे लंबे युद्ध को समाप्त करने के पक्ष में हैं। हमलों के कारण दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट के बीच अब कूटनीतिक समाधान की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ट्रंप की डेडलाइन: ‘मई के मध्य तक खत्म हो जंग’

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने निजी तौर पर अपने सलाहकारों को स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य-पूर्व में एक और “अंतहीन युद्ध” नहीं चाहते। ट्रंप ने सलाहकारों से आग्रह किया है कि वे 4 से 6 सप्ताह की उस समयसीमा का सख्ती से पालन करें, जो सार्वजनिक रूप से तय की गई है। माना जा रहा है कि ट्रंप इस विवाद को मई के मध्य में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाले प्रस्तावित शिखर सम्मेलन से पहले सुलझाना चाहते हैं।

“वे समझौता चाहते हैं, पर कहने से डरते हैं”

NRCC के एक फंडरेजिंग डिनर के दौरान ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की आक्रामकता और सफलता का दावा करते हुए कहा: “हमने आठ युद्धों का निपटारा किया है और अब एक और जीत रहे हैं। ईरान के साथ हम जो कर रहे हैं, वैसा पहले किसी ने नहीं देखा। वे बातचीत की मेज पर आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि उनके अपने लोग या हम उन्हें मार देंगे।” व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी पुष्टि की है कि ट्रंप की प्राथमिकता हमेशा ‘शांति’ रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की कड़ी चेतावनियों के बाद ईरान सार्थक बातचीत के लिए आगे आया है। इसी के चलते राष्ट्रपति ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ को ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर होने वाले हमलों को अस्थायी रूप से टालने का निर्देश दिया है।

ईरान का रुख: ‘शर्तें हमारी होंगी’

दूसरी ओर, ईरान का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। तेहरान ने अमेरिका द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ईरान सरकार का कहना है कि: युद्ध का अंत केवल तेहरान की शर्तों और समयसीमा पर होगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे ‘दुश्मन’ पर करारा प्रहार जारी रखेंगे। ईरान अपनी रक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

दुनिया पर असर: ऊर्जा संकट और कूटनीति

अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक तेल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे कई देशों को भारी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। यदि अगले 6 हफ्तों में समझौता होता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी संजीवनी साबित होगा।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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