पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड: करोड़ों के नुकसान और मरम्मत पर HPCL की चुप्पी, जांच के घेरे में ‘टाटा प्रोजेक्ट्स’ की यूनिट

बाड़मेर के पचपदरा में स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी (HRRL) में लगी भीषण आग के बाद अब प्रबंधन और पेट्रोलियम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे को बीते कई घंटे हो चुके हैं, लेकिन एचपीसीएल और राज्य सरकार के पेट्रोलियम विभाग ने अब तक न तो नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी किया है और न ही यह बताया है कि रिफाइनरी के संचालन में अब कितनी देरी होगी।

टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा निर्मित यूनिट में लगी आग

हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में आग लगी थी। इस यूनिट के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट्स (Tata Projects) के पास है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खामी, उपकरण में रिसाव या निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण में चूक इस बड़े हादसे की वजह हो सकती है। किस कंपनी के पास है कौन सी जिम्मेदारी? रिफाइनरी के अलग-अलग ब्लॉक्स का काम देश की दिग्गज कंपनियों को सौंपा गया है:

  • टाटा प्रोजेक्ट्स: क्रूड व वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट, डिलेड कोकर यूनिट।

  • टोयो इंजीनियरिंग: डीजल हाइड्रो ट्रीटिंग और हाइड्रोजन जनरेशन यूनिट।

  • मेघा इंजीनियरिंग: सल्फर रिकवरी, पॉली एथिलीन, पॉली प्रोपलीन और स्टीम टरबाइन।

  • L&T (एलएंडटी): पेट्रोकेमिकल फ्लूडाइज्ड कैटालिटिक क्रैकिंग और ड्यूल फीड क्रैकर यूनिट।

खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा मानक जांच के घेरे में

हादसे के बाद जांच की आंच केवल तकनीकी टीम तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियां भी ‘साजिश’ के एंगल से सबूत खंगाल रही हैं। विशेष रूप से प्रधानमंत्री के संभावित सभा स्थल और आसपास के डोम (Dome) हटाने पर रोक लगा दी गई है। साइट इंजीनियरों और संबंधित कॉन्ट्रेक्टर कंपनियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है कि आखिर सुरक्षा मानकों में सेंध कैसे लगी?

चुप्पी के पीछे क्या है कारण?

आम तौर पर ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में किसी भी दुर्घटना के बाद ‘मरम्मत अवधि’ (Repair Period) का खुलासा किया जाता है, लेकिन एचपीसीएल की चुप्पी यह संकेत दे रही है कि नुकसान अनुमान से कहीं अधिक हो सकता है। यदि सीडीयू जैसी महत्वपूर्ण यूनिट को बड़ा नुकसान हुआ है, तो रिफाइनरी के शुरू होने की समय-सीमा कई महीने पीछे खिसक सकती है, जिसका सीधा असर राजस्थान के आर्थिक राजस्व और केंद्र के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर पड़ेगा।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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