NASA ने पृथ्वी के करीब आने वाले एक बड़े एस्टरॉयड को लेकर अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक “2026 JU” नाम का एस्टरॉयड 16 मई को धरती के बेहद करीब से गुजरने वाला है। इसकी चौड़ाई करीब 70 फीट बताई जा रही है और नासा ने इसके आकार की तुलना एक हवाई जहाज से की है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एस्टरॉयड पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर लगभग 20 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। हालांकि यह दूरी अंतरिक्षीय पैमाने पर काफी कम मानी जाती है, लेकिन फिलहाल इससे पृथ्वी को किसी प्रत्यक्ष खतरे की आशंका नहीं जताई गई है।
पृथ्वी के पास मौजूद हैं हजारों एस्टरॉयड
वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के आसपास करीब 16 हजार एस्टरॉयड मौजूद हैं। इन्हें ग्रहों के टूटे हुए टुकड़ों के रूप में देखा जाता है, जो लगातार सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। इनकी संरचना और बनावट ग्रहों से मिलती-जुलती मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एस्टरॉयड सौरमंडल के निर्माण के समय ही बने थे। आमतौर पर ये अंतरिक्ष में सुरक्षित दूरी पर रहते हैं, लेकिन जब कोई एस्टरॉयड पृथ्वी के करीब आता है तो वैज्ञानिक उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखते हैं।
क्यों बढ़ जाती है चिंता?
नासा के अनुसार 75 लाख किलोमीटर के दायरे में आने वाले एस्टरॉयड को संभावित रूप से खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में 2026 JU का 20 लाख किलोमीटर की दूरी तक पहुंचना वैज्ञानिकों की निगरानी का विषय बन गया है। हालांकि पृथ्वी से एस्टरॉयड की टक्कर बेहद दुर्लभ घटना मानी जाती है, लेकिन इसकी संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण काफी शक्तिशाली है और यह अंतरिक्षीय वस्तुओं को अपनी ओर खींच सकता है।
एस्टरॉयड से बचाव पर काम कर रही हैं अंतरिक्ष एजेंसियां
दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार ऐसे मिशनों और तकनीकों पर काम कर रही हैं जिनसे भविष्य में किसी संभावित एस्टरॉयड टक्कर के खतरे को कम किया जा सके। NASA पहले भी ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुकी है, जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष में ही एस्टरॉयड की दिशा बदलना है ताकि पृथ्वी को नुकसान से बचाया जा सके। वैज्ञानिक फिलहाल कई महत्वपूर्ण एस्टरॉयड्स की लगातार स्टडी और ट्रैकिंग कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों की नजर बनी हुई है
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल 2026 JU से किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन इस तरह के एस्टरॉयड्स की निगरानी भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। आने वाले वर्षों में एस्टरॉयड ट्रैकिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी अंतरिक्ष विज्ञान का एक अहम हिस्सा बनने जा रही है।
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Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







