संसद के पास पहुंचे प्रदर्शनकारी, धर्मेंद्र प्रधान ने संसद के भीतर गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात

नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा में धांधली के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। प्रदर्शनकारी संसद परिसर के काफी करीब पहुंच गए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए संसद के मुख्य द्वार बंद कर दिए। भीड़ को नियंत्रित करने और रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस भारी हंगामे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद के भीतर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की। फिलहाल, गतिरोध सुलझाने के लिए सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है।

संसद परिसर में अभेद्य सुरक्षा, ट्रैफिक प्रभावित

 प्रदर्शनकारियों के संसद के पास पहुंचने की वजह से इलाके में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती कर पूरे संसद परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर केंद्रीय सचिवालय समेत आसपास के कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट थोड़े समय के लिए बंद किए गए, जिन्हें स्थिति सामान्य होने पर दोबारा खोल दिया गया। सुरक्षा कारणों से इलाके के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।

अभिजीत दीपके ने खत्म किया अनशन, नड्डा से मिलेंगे प्रवक्ता

[tweet url=”https://twitter.com/PTI_News/status/2079103872761774309″]

संसद मार्च और सरकार से बातचीत की सुगबुगाहट के बीच सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। संगठन के अनुसार, अभिजीत ने यह अनशन नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाली एक छात्रा के पीड़ित पिता के आग्रह पर तोड़ा है। वहीं, गतिरोध खत्म करने के लिए सीजेपी के प्रवक्ता सरकार की पहल पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात करने रवाना हुए हैं। सीजेपी नेताओं ने आरोप भी लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर बिना किसी आपात स्थिति के एंबुलेंस भेजकर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई।

शशि थरूर ने लाठीचार्ज पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब युवा और प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे, तब बल प्रयोग की कोई आवश्यकता नहीं थी। लाठीचार्ज हिंसा की श्रेणी में आता है, न कि अहिंसा की। संसद में जारी गतिरोध पर थरूर ने कहा कि देश के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होना ही लोकतंत्र की आत्मा है और सरकार को विपक्ष तथा जनता की आवाज दबाने के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

Leave a Comment