JJM घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से पूर्व मंत्री महेश जोशी को बड़ी राहत, ACB केस में मिली जमानत

जयपुर: राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के मंत्री रहे वरिष्ठ नेता महेश जोशी को बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से दर्ज मामले में महेश जोशी और एक अन्य आरोपी मुकेश पाठक की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस फैसले के बाद ACB मामले में जेल में बंद महेश जोशी के बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। जल जीवन मिशन से जुड़े कथित टेंडर घोटाले, अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर महेश जोशी लंबे समय से जांच के दायरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने को राजस्थान की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब मामले में आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला

महेश जोशी की जमानत याचिका पर 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी है। इससे पहले अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने महेश जोशी, पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और सरकारी खजाने को कथित तौर पर हुए करोड़ों रुपये के नुकसान को ध्यान में रखा था। हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत के ताजा फैसले से उन्हें ACB की ओर से दर्ज मामले में राहत मिली है।

मई 2026 में ACB ने किया था दोबारा गिरफ्तार

महेश जोशी इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जेल जा चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अप्रैल 2025 में दर्ज इस मामले में वह करीब सात महीने तक हिरासत में रहे थे। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र और लंबी हिरासत अवधि को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित जमानत दे दी थी।

हालांकि, ED मामले में राहत मिलने के कुछ महीनों बाद ही उनकी मुश्किलें फिर बढ़ गईं। 7 मई 2026 को राजस्थान ACB ने 900 करोड़ रुपये से अधिक के कथित टेंडर आवंटन घोटाले और रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में उन्हें जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से महेश जोशी ACB के मामले में हिरासत में थे। इसी मामले में जमानत के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर अब उन्हें राहत मिल गई है।

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए पेयजल पहुंचाना है। राजस्थान में इस योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं और कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी धन आवंटित किया गया था। जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, योजना के तहत टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि कुछ कंपनियों को ठेके दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इस प्रक्रिया में रिश्वतखोरी तथा कमीशनखोरी भी हुई। मामले में ठेकों, दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

इस प्रकरण में ED और राजस्थान ACB अलग-अलग कानूनी पहलुओं की जांच कर रही हैं। महेश जोशी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

जमानत के बाद राजस्थान की राजनीति में बढ़ी हलचल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से महेश जोशी को ACB मामले में राहत मिली है। उनकी जमानत के बाद राजस्थान के राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, उनकी रिहाई जमानत आदेश की शर्तों और अन्य मामलों में उनकी कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी। जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान में लंबे समय से चर्चित मामला रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद महेश जोशी को कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन कथित टेंडर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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