
राजसमंद । मेरा युवा भारत (माय भारत) केंद्र, राजसमंद द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा अभियान के तहत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धोइंदा में एक विशेष निबंध प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए माय भारत राजसमंद के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक कार्तिक बापडोत ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य नरपत दान ने की। प्राचार्य नरपत दान ने कहा कि इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी लेखन कला के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने दृष्टिकोण को साझा किया।
प्रतियोगिता के प्रमुख विषय और युवाओं के विचार
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण समसामयिक एवं प्रेरणादायक विषय रहे, जिन पर प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे:
- स्वच्छ भारत: प्रतिभागियों ने स्वच्छता को केवल एक अभियान तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली और जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने गांवों से लेकर शहरों तक साफ-सफाई के महत्व और पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए।
- डिजिटल इंडिया: युवाओं ने देश में हो रहे तकनीकी बदलाव, डिजिटल साक्षरता, ई-शासन और कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया।
- विकसित भारत @2047: वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति की भूमिका और प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया।
राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक कार्तिक बापडोत ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से युवाओं में वैचारिक परिपक्वता आती है और वे देश की विकासात्मक प्राथमिकताओं से जुड़ते हैं।
विजेता और सम्मान
निबंध प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका ममता गोस्वामी, अंजू चारण और आराधना त्रिपाठी ने निभाई। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे:
- प्रथम स्थान: संकी कुमारी गरासिया
- द्वितीय स्थान: प्रियंका लोहार
- तृतीय स्थान: संध्या सालवी


कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को उपरना ओढ़ाकर एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उपस्थित सभी युवाओं को स्वच्छता एवं राष्ट्र सेवा की शपथ दिलाई गई।
गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर कमलेश कुमार टेलर, युवा स्वयंसेवक गजेंद्र सेन, किरण राव, रंजू नागौरी, धर्म सिंह मीणा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन गजेंद्र सेन द्वारा किया गया।
यह आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।









