Rajasthan News: IAS शिखर अग्रवाल के बाद IPS पत्नी प्रशाखा माथुर भी APO, 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में बढ़ीं मुश्किलें

राजस्थान में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े कथित संपत्ति खरीद मामले में सरकार की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद अब उनकी पत्नी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशाखा माथुर को पुलिस मुख्यालय में एडीजी पुलिस (कल्याण) के पद से हटा दिया गया है। यह मामला एक निजी कंपनी से परिवार के सदस्यों के नाम पर बड़ी संख्या में विला और कॉटेज खरीदने तथा बाद में उन्हीं संपत्तियों को संबंधित कंपनी को लीज पर देने के आरोपों से जुड़ा है।

प्रशाखा माथुर को APO करने का आदेश जारी

डॉ. प्रशाखा माथुर राजस्थान कैडर की 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वह पुलिस मुख्यालय में एडीजी पुलिस (कल्याण) के पद पर तैनात थीं। अब कार्मिक विभाग के आदेश के बाद उन्हें आगामी पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया है।

इससे पहले उनके पति और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को भी APO किया जा चुका है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की नौकरशाही में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, APO किया जाना अपने आप में किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप साबित होने या दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं है।

क्या है 40 विला और कॉटेज खरीदने का पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विवाद गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से जुड़ा है, जो होटल और रिसॉर्ट कारोबार से संबंधित है। आरोप है कि आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने अलवर के अजबगढ़ और उदयपुर के बुझड़ा में इसी कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदे थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन संपत्तियों में उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज और अलवर के अजबगढ़ में 20 विला शामिल हैं। आरोप यह भी है कि संपत्तियां खरीदने के बाद उन्हें उसी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया। इस कथित व्यवस्था के तहत सालाना करीब 1.80 करोड़ रुपये किराये की राशि मिलने की बात सामने आई है। इन संपत्तियों की खरीद कीमत और बाजार मूल्य के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन सभी लेन-देन और आरोपों की अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।

ACB जांच में भी सामने आए गंभीर सवाल

इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्यूरो ने शिखर अग्रवाल की भूमिका, निजी कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने और संपत्तियों की खरीद से जुड़े पहलुओं की जांच की है। 30 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत जांच को भी मंजूरी दी है।

जांच के दायरे में कथित तौर पर रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में छूट, आवश्यक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना मंजूरी और कंपनी को दिए गए विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। ACB यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन फैसलों से किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को कोई नुकसान तो नहीं हुआ।

अब प्रशाखा माथुर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

40 संपत्तियों की खरीद से जुड़े मामले में प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सामने आने के बाद उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब उन्हें APO किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि जांच में उनके नाम पर दर्ज संपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल हो सकती है। फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों को जांच के आधार पर परखा जाना बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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