बाड़मेर में सरपंच चुनाव के बाद वायरल वीडियो से मचा हड़कंप, पोलिंग पार्टी पर शराब पार्टी और मतगणना में गड़बड़ी के आरोप

राजस्थान के पंचायती राज चुनाव 2026 के बीच बाड़मेर जिले की शिव तहसील स्थित झांफली कल्ला ग्राम पंचायत से जुड़ा एक मामला चर्चा में आ गया है। सरपंच पद के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो ने मतदान और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव में उगमदान को विजयी घोषित किया गया, जबकि करणीदान को हार का सामना करना पड़ा। अब वायरल वीडियो के आधार पर पोलिंग पार्टी के कुछ सदस्यों पर शराब पार्टी करने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

वायरल वीडियो में पोलिंग पार्टी के सदस्यों पर शराब पार्टी का आरोप

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोग गले में आधिकारिक पहचान पत्र पहने दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि ये लोग चुनाव ड्यूटी में तैनात पोलिंग पार्टी के सदस्य हैं और कथित तौर पर शराब पार्टी कर रहे हैं। वीडियो के साथ सामने आए ऑडियो में कुछ विवादित बातचीत सुनाई देने का दावा भी किया जा रहा है। इसमें कथित तौर पर ‘बूथ अपणो होन जीतायो हो, फुल एंड फाइनल’ जैसे शब्द सुनाई देते हैं। इसके अलावा, ‘मजो कर दियो खोदे के’ और ‘कुण देखे पनिया, थोनो ही टेकना हो’ जैसे संवादों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन कथित बयानों को कुछ लोग चुनाव में मिलीभगत और मतगणना में गड़बड़ी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, वीडियो में मौजूद लोगों की पहचान और बातचीत का वास्तविक संदर्भ अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।

मतगणना में गड़बड़ी और बिना हस्ताक्षर परिणाम घोषित करने के आरोप

चुनाव में पराजित पक्ष और कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि परिणाम घोषित करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत जरूरी हस्ताक्षर नहीं करवाए गए और जल्दबाजी में हार-जीत की घोषणा कर दी गई। स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि मतपत्रों और पर्चियों की जांच को लेकर अनियमितताएं हुईं। वायरल ऑडियो में रिटर्निंग ऑफिसर से जुड़ी कथित बातचीत का भी जिक्र किया जा रहा है, जिसे लेकर मतगणना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से जिला निर्वाचन अधिकारी और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। मांग है कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोग कौन हैं और क्या वे वास्तव में झांफली कल्ला ग्राम पंचायत में चुनाव ड्यूटी पर तैनात थे। इसके साथ ही ऑडियो में सुनाई देने वाली बातचीत का संदर्भ स्पष्ट करने और मतगणना से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी उठ रही है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।

प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई

झांफली कल्ला ग्राम पंचायत के चुनाव से जुड़ा यह मामला अब निष्पक्ष चुनाव और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा में है। फिलहाल वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की ओर से जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और मतगणना प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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