बिहार के भोजपुर में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों ने राज्य सरकार द्वारा घोषित आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। मृतक की मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता सरकारी सहायता नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्याय और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाना है। पीड़ित परिवार ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की गिरफ्तारी और उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि सिर्फ निचले स्तर के कर्मियों पर गाज गिराने या अधिकारियों का तबादला करने से न्याय नहीं मिलेगा।
‘छोटी मछली पकड़ने से क्या होगा, मुख्य जिम्मेदार तो SDM है’: मां आशा देवी
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भावुक होते हुए कहा कि सरकार और मुख्यमंत्री के वादों पर वे तभी विचार करेंगी जब उनके बेटे के हत्यारों को सजा मिल जाएगी। कुछ पुलिसकर्मियों के निलंबन और एसटीएफ (STF) जवान की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा: “सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने या निलंबन की खानापूरी करने से कुछ नहीं होगा। बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इस पूरी घटना का मुख्य जिम्मेदार तो SDM है। छोटी मछली को पकड़ने से क्या हासिल होगा? मामले में शामिल सभी बड़े अधिकारियों की धर-पकड़ होनी चाहिए।” इसके साथ ही आशा देवी ने मांग की कि भरत तिवारी को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए और जिन ग्रामीणों के हक के लिए उन्होंने अपनी जान दी, उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
न्याय हमारी पहली प्राथमिकता, नौकरी नहीं: भाई चंदन तिवारी
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि परिवार का पूरा ध्यान अभी मुआवजे या नौकरी के बजाय केवल न्याय पाने पर केंद्रित है। उन्होंने घटना में शामिल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेजने की मांग की। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर चंदन तिवारी ने कहा कि परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर चर्चा करेंगे और माता-पिता ही इस संबंध में आगे का अंतिम निर्णय लेंगे। फिलहाल न्याय से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
मुख्यमंत्री ने किया था नौकरी और सहायता राशि का ऐलान
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर घोषणा की थी कि मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया गया था, जिसे परिजनों ने फिलहाल स्वीकार करने से मना कर दिया है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








