नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला PG बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते NDRF, फायर ब्रिगेड, डॉग स्क्वॉड और JCB की मदद से बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस के अनुसार, हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद छात्रों और स्थानीय लोगों ने PG संचालकों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हादसा होते ही इलाके में कुछ PG संचालकों ने अपने साइनबोर्ड और होर्डिंग हटाने शुरू कर दिए, जिससे उनकी जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रों ने PG संचालकों पर लगाए गंभीर आरोप
सत्य निकेतन में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि पहले उसे धमाके जैसी तेज आवाज सुनाई दी और इसके बाद एंबुलेंस के सायरन सुनाई देने लगे। छात्रा के मुताबिक, सत्य निकेतन छात्रों के रहने का प्रमुख इलाका है और यहां बड़ी संख्या में PG संचालित होते हैं, लेकिन कई जगह छात्रों की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। छात्रा ने दावा किया कि हादसे के तुरंत बाद कुछ PG संचालक अपने साइनबोर्ड और होर्डिंग हटाने लगे। उसने सवाल उठाया कि यदि संचालकों को छात्रों की सुरक्षा की चिंता है तो हादसे के तुरंत बाद पहचान से जुड़े बोर्ड क्यों हटाए गए। उसने छोटे प्लॉट पर कई मंजिला इमारतें बनाए जाने और इंजीनियरिंग मानकों तथा आपातकालीन निकास व्यवस्था की अनदेखी का भी आरोप लगाया।
बिल्डिंग के नीचे चल रहा था काम, पानी जमा होने का भी दावा
चश्मदीद छात्रा ने यह भी दावा किया कि हादसे वाली इमारत के नीचे काफी समय से काम चल रहा था। स्थानीय लोगों के हवाले से वहां पानी जमा होने की बात भी सामने आई। छात्रा ने सवाल उठाया कि यदि इमारत के नीचे निर्माण या अन्य काम चल रहा था तो संबंधित अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी कहां थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मलबे में फंसे थे कई छात्र
एक अन्य चश्मदीद छात्र ने बताया कि हादसे में गिरी इमारत लड़कों का PG था, जिसका नाम ‘हॉस्टल डेज’ बताया गया है। उसके अनुसार, इमारत गिरने से पास की एक अन्य PG बिल्डिंग को भी भारी नुकसान पहुंचा और वह भी गिर गई। रविवार दोपहर होने के कारण कई छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। इमारत गिरते ही कई लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव दल ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, PG में मौजूद लोगों की सही संख्या रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
एक की मौत, तीन की हालत गंभीर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मलबे से निकाले गए एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान के अनुसार, हादसे के समय इमारत में करीब 15 से 20 छात्र मौजूद थे। इनमें से 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य के लिए सभी संबंधित टीमें मौके पर सक्रिय हैं।
NDRF, फायर ब्रिगेड और JCB ने संभाला मोर्चा
फायर विभाग को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद फायर टेंडर, NDRF की टीमें, डॉग स्क्वॉड और भारी JCB मशीनें घटनास्थल पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान लगातार जारी रहा।
हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने घटना पर दुख जताते हुए सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को तत्काल सहायता देने की मांग भी की।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







