राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े करीब 20,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित मामले में नामजद कई अन्य मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। इससे पहले जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने 5 अगस्त को सभी पक्षों की लंबी दलीलों और बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल सहित इन आरोपियों की अर्जी भी खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने न केवल पूर्व मंत्री, बल्कि इस बड़े घोटाले में शामिल कई पूर्व नौकरशाहों, अधिकारियों और निजी बिचौलियों को भी राहत देने से इनकार कर दिया है। जमानत याचिका खारिज होने वालों में : सुबोध अग्रवाल (पूर्व IAS अधिकारी) संजय बड़ाया (निजी व्यक्ति) महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन एसई) कृष्णदीप गुप्ता संजीव कुमार गुप्ता दिलीप कुमार गौड़ मुकेश पाठक प्रमुख नाम शामिल हैं
हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजेश चौधरी, एडवोकेट नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा ने आरोपियों को राहत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन, निर्माण कार्यों और टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं, पद का दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऊंची दरों पर ठेके देने का खेल हुआ है। आरोपों की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए सभी याचिकाएं निरस्त कर दीं।
कोर्ट में बचाव और अभियोजन पक्ष के तर्क
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महेश जोशी के वकील का तर्क: पूर्व मंत्री के वकील स्नेहदीप ने तर्क दिया कि FIR दर्ज होने के डेढ़ साल बाद उनकी गिरफ्तारी की गई। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक ईडी हिरासत के दौरान एसीबी ने उन्हें कस्टडी में लेने का प्रयास नहीं किया। इसके अलावा, वह बिड इवैल्यूएशन या फाइनेंस कमेटी के सदस्य भी नहीं थे, टेंडर से जुड़ी प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संपादित की गई थी।
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तत्कालीन SE के वकील का पक्ष: महेंद्र प्रकाश सोनी के वकील सुधीर जैन ने दलील दी कि समान तथ्यों पर एक से अधिक FIR दर्ज की गई हैं। ठेका फर्म के संचालकों को पूर्व में राहत मिल चुकी है और चार्जशीट दाखिल होने के कारण ट्रायल में लंबा समय लगेगा।
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सरकारी पक्ष का पलटवार: अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि तत्कालीन मंत्री होने के नाते आरोपी विभाग के प्रशासनिक प्रमुख थे और अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऊंची दरों पर टेंडर स्वीकृत किए गए।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के मद्देनजर सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत बनाए रखने का आदेश दिया।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।






