मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों, महिला कार्मिकों और दिव्यांग कर्मचारियों के हित में कई ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी फैसले लिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने प्रेस वार्ता के माध्यम से कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि बजट घोषणाओं की अनुपालना में राजस्थान सेवा नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। मंत्रिमंडल के इन फैसलों से जहां एक ओर मृत सरकारी कर्मियों के आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर महिला व दिव्यांग कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगें पूरी होंगी।
मृत सरकारी कर्मचारी की ‘पुत्रवधू’ को भी मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति
कैबिनेट ने राजस्थान अनुकंपा नियुक्ति नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पात्र आश्रितों की श्रेणी में अब ‘पुत्रवधू’ (Daughter-in-law) को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद यदि किसी सरकारी कर्मचारी की अकाल मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पुत्रवधू अनुकंपा नियुक्ति की हकदार होगी। इससे संकटग्रस्त परिवार का भरण-पोषण बेहतर तरीके से हो सकेगा।
2. ट्रेनिंग के बाद पद छोड़ने पर वेतन-भत्तों की नहीं होगी वसूली
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद यदि कोई कार्मिक प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के 2 वर्ष की अवधि में पद त्याग करता है, तो उससे अब केवल प्रशिक्षण व्यय (Training Expense) वसूला जाएगा, उससे प्राप्त वेतन और भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। इसके अलावा, यदि कोई कार्मिक केंद्र या राज्य सरकार के अन्य विभागों या उपक्रमों में नई नियुक्ति के कारण पद त्यागता है, तो उससे प्रशिक्षण व्यय और वेतन-भत्ते—दोनों में से किसी की भी वसूली नहीं की जाएगी।
3. महिला कर्मियों के लिए ‘चाइल्ड केयर लीव’ और ‘सरोगेसी लीव’ के नियम आसान
महिलाओं व बच्चों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजस्थान सेवा नियम-1951 में संशोधन को मंजूरी दी गई है: एकल महिला कर्मचारी (Single Female Employees): अब एक कैलेंडर वर्ष में ‘चाइल्ड केयर लीव’ (Child Care Leave) 3 चरणों के बजाय 6 चरणों में स्वीकृत कराई जा सकेंगी। सरोगेसी मातृत्व अवकाश (Surrogacy Maternity Leave): सरोगेसी के जरिए संतान प्राप्ति के मामलों में ‘सरोगेट मदर’ (Surrogate Mother) को 180 दिन तथा ‘कमीशनिंग मदर’ (Commissioning Mother) को 90 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाएगा।
4. पदोन्नति (Promotion) के अनुभव में 2 वर्ष की छूट
मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 में कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए न्यूनतम आवश्यक अनुभव में 2 वर्ष की सशर्त छूट देने का प्रावधान किया है। यह लाभ उन कार्मिकों को मिलेगा जिन्हें वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान यह शिथिलन प्राप्त नहीं हुआ था। इससे अनुभव की कमी के कारण वर्षों से खाली पड़े पद भरे जा सकेंगे और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।
5. दिव्यांग कर्मचारियों को 2016 से मिलेगा नोशनल प्रमोशन बेनेफिट
राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम-2026 का अनुमोदन करते हुए सरकार ने राजकीय सेवा में कार्यरत दिव्यांग कार्मिकों को पदोन्नति में मिलने वाले 4 प्रतिशत आरक्षण का नोशनल बेनेफिट (Notional Benefit) 30 जून, 2016 से देने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले से राज्य के दिव्यांग कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो गई है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।






