मनीष तिवारी ने की CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 13 करोड़ नाम हटाने पर उठाए सवाल

चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग के कामकाज की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने की बात कही है। तिवारी का आरोप है कि SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी की है।

मनीष तिवारी ने CEC के इस्तीफे की मांग की

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने के मामले में पारदर्शिता जरूरी है।

तिवारी के मुताबिक, SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम और उन्हें सूची से बाहर करने के कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होनी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।

13 करोड़ नाम हटाए जाने पर उठाए सवाल

मनीष तिवारी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इस आंकड़े को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रत्येक मतदाता का नाम हटाए जाने का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

तिवारी ने यह भी कहा कि यदि मौजूदा प्रक्रिया को रद्द किया जाता है, तो जून 2024 की मतदाता सूची को आधार बनाकर नए सिरे से मतदाता सूची तैयार की जानी चाहिए।

हालांकि, मतदाता सूची के मसौदे से नाम हटने का अर्थ हर मामले में पात्र मतदाता का स्थायी रूप से नाम कटना नहीं होता। संबंधित प्रक्रिया में दावे, आपत्तियां और नाम दोबारा शामिल कराने के प्रावधान भी होते हैं।

चुनाव आयोग के कामकाज की जांच के लिए JPC की मांग

तिवारी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि आयोग के फैसलों और SIR से जुड़ी प्रक्रिया की संसदीय स्तर पर जांच होनी चाहिए।

यह मांग ऐसे समय में आई है, जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।

चंडीगढ़ की मतदाता सूची में बदलाव का भी किया जिक्र

मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ की मतदाता सूची के आंकड़ों का हवाला देते हुए भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 1 जून 2024 को चंडीगढ़ में 6,59,905 मतदाता थे, जबकि हाल में प्रकाशित सूची में यह संख्या करीब 4.60 लाख रह गई। उन्होंने इस अंतर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने के पीछे क्या कारण हैं। तिवारी ने मतदाता सूची में हुए बदलावों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

UNGA में पाकिस्तान को लेकर भी दिया बयान

SIR के अलावा मनीष तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर पाकिस्तान को लेकर भारत की कूटनीतिक रणनीति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक प्रयास तेज करने की बात कही। तिवारी ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि भारत को इस मुद्दे पर वैश्विक समर्थन जुटाना चाहिए। उनका यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर चल रही चर्चा के बीच आया।

SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से SIR से जुड़े निर्णय किए गए हैं। मनीष तिवारी की मांगों के बाद मतदाता सूची में बदलाव, नाम हटाने के कारणों को सार्वजनिक करने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

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Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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