नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के जज जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने हैदराबाद की रियल एस्टेट कंपनी केएलएसआर इंफ्राटेक लिमिटेड से जुड़े एक दिवालियापन मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के एक सम्मानित जज ने उन पर एक पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाने का दबाव बनाया। इस मामले ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
13 अगस्त को किया अलग होने का ऐलान
जस्टिस शर्मा ने 13 अगस्त को अपने आदेश में साफ लिखा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सबसे सम्मानित सदस्यों में से एक की ओर से संपर्क किया गया था और उनसे एक पार्टी के पक्ष में निर्णय देने का आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि यह देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ और इसी वजह से उन्होंने खुद को इस केस से अलग कर लिया।
क्या है पूरा मामला?
मामला हैदराबाद स्थित केएलएसआर इंफ्राटेक लिमिटेड से जुड़ा है। एक लेनदार एएस मेट कॉर्प प्राइवेट लिमिटेड ने कंपनी पर 2.88 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) की बकाया राशि का दावा किया था। हैदराबाद की एनसीएलटी पीठ ने एएस मेट कॉर्प के पक्ष में फैसला सुनाया और कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने की अनुमति दी। इस आदेश को केएलएसआर ने चुनौती दी, जिसके बाद मामला NCLAT में आया। 18 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।
केएलएसआर का पक्ष
कंपनी ने तर्क दिया कि – पिछले पांच वर्षों में उसने लगभग 300 करोड़ का कारोबार किया है, इसलिए उसे दिवालिया घोषित करना अनुचित है।एएस मेट कॉर्प के निदेशकों पर 30 जून 2022 को कदाचार के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और वे लंबे समय तक फरार रहे। ऐसे में दिवालियापन की कार्यवाही पर सवाल उठता है।
एएस मेट कॉर्प का जवाब
लेनदार कंपनी का कहना है कि –उसके निदेशकों को तेलंगाना हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वे फरार नहीं हैं और केएलएसआर का तर्क केवल कार्यवाही को लंबा खींचने के लिए है।
न्यायपालिका में उठे सवाल
जस्टिस शर्मा का यह कदम न्यायपालिका पर दबाव और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ गया है। सवाल यह है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का कोई जज ही निचली अदालतों पर प्रभाव डालने की कोशिश करेगा तो न्याय की स्वतंत्रता पर क्या असर पड़ेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ कॉर्पोरेट दिवालियेपन तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता और निष्पक्षता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।