महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल और बगावत की अटकलों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। राज्यसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बुधवार को बागी तेवर दिखा रहे नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के विश्वास को तोड़ने वालों के खिलाफ इस बार निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में राउत ने कहा कि जिन नेताओं को बाला साहेब ठाकरे ने परिवार का हिस्सा माना और उद्धव ठाकरे ने राजनीतिक पहचान दी, वही लोग आज पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
“जनादेश लेकर पार्टी छोड़ना लोकतंत्र के साथ धोखा”
संजय राउत ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के टिकट और चुनाव चिन्ह पर जीतकर संसद पहुंचे सांसद यदि पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो पहले अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए चुना है। राउत ने कहा कि यदि कोई सांसद वास्तव में अपनी लोकप्रियता पर भरोसा करता है तो उसे दोबारा जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए। बिना इस्तीफा दिए पार्टी बदलना मतदाताओं के विश्वास के साथ अन्याय है। संभावित बगावत की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर तैयारी शुरू कर दी है। राउत ने बताया कि पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि दल-बदल की कोशिशें आगे बढ़ती हैं तो पार्टी संविधान और कानून के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
2022 जैसे हालात दोहराने की कोशिश का आरोप
राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में एक बार फिर 2022 जैसी राजनीतिक स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उस समय जिस तरह शिवसेना में विभाजन हुआ था, वैसी परिस्थितियां दोबारा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार न केवल पार्टी बल्कि शिवसैनिक और आम जनता भी ऐसी कोशिशों का विरोध करेगी।
ओमराजे निंबालकर को लेकर लगाया दबाव का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने दावा किया कि कुछ सांसदों पर राजनीतिक दबाव बनाकर पक्ष बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से सांसद ओमराजे निंबालकर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें कुछ मामलों के फैसलों को लेकर अप्रत्यक्ष संदेश दिए गए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं या शिंदे गुट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
खरीद-फरोख्त के आरोपों से गरमाई राजनीति
संजय राउत ने सबसे गंभीर आरोप सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को पार्टी बदलने के लिए भारी आर्थिक प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। राउत के अनुसार उन्हें फोन पर जानकारी मिली कि सांसदों को करोड़ों रुपये के ऑफर दिए गए हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ बना राजनीतिक चर्चा का केंद्र
बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष इसे जनादेश के साथ खिलवाड़ बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष अब तक इन आरोपों को खारिज करता रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में टूट की खबरें सच साबित होती हैं तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें उन सांसदों पर टिकी हैं जिनके नाम बगावत की अटकलों में सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति है या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








