TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! निष्कासित विधायकों का बड़ा दावा, 50 से अधिक विधायकों का समर्थन होने का किया दावा

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है, जिसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के दावों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दोनों नेताओं ने दावा किया है कि उन्हें 50 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे पार्टी के भीतर संभावित गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विधानसभा परिसर में दिखे दोनों बागी विधायक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी से निलंबित किए गए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा हाल ही में कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में देखे गए। इसके बाद राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया कि क्या पार्टी के भीतर कोई नया शक्ति केंद्र उभर रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं की मौजूदगी और उनके दावों ने पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।

50 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा

दोनों बागी विधायकों ने दावा किया है कि राज्य विधानसभा में उन्हें 50 से अधिक विधायकों का समर्थन हासिल है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो टीएमसी के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।

नेता प्रतिपक्ष को लेकर शुरू हुई चर्चाएं

जानकारी के अनुसार, पार्टी के भीतर सक्रिय एक कथित बागी समूह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिर भी इस तरह की चर्चाओं ने विधानसभा की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना को जन्म दे दिया है। गौरतलब है कि टीएमसी ने सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व का आरोप था कि दोनों नेता संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन कर रहे थे और लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे।

फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप से गहराया विवाद

विवाद तब और बढ़ गया जब दोनों विधायकों ने विधानसभा में पारित एक प्रस्ताव को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि 6 मई को नेता प्रतिपक्ष, उपनेता प्रतिपक्ष और चीफ व्हिप के नामों को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर कथित तौर पर फर्जी तरीके से किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके स्वयं के हस्ताक्षर भी जाली बनाए गए थे। इस आरोप के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

निष्कासन के अगले ही दिन दोनों नेताओं को कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में कई टीएमसी विधायकों से मुलाकात करते हुए देखा गया। इन बैठकों के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन मुलाकातों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऋतब्रत बनर्जी ने हाल ही में पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा था कि टीएमसी अब अपने मूल सिद्धांतों से दूर होती जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना कैसे करता है और आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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