अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा कर दी है। यह फैसला 1 अगस्त 2025 से लागू होगा और इसका असर भारत के प्रमुख निर्यात उद्योगों और आम जनता तक महसूस किया जाएगा।
कौन-कौन होंगे प्रभावित?
1. टेक्सटाइल और परिधान उद्योग:
भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले वस्त्रों पर शुल्क लगने से प्रतिस्पर्धा में गिरावट आएगी। इससे कपड़ा उद्योग से जुड़े लाखों श्रमिकों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
2. रत्न और आभूषण उद्योग:
भारत, विशेषकर सूरत जैसे शहर, अमेरिका को बड़े पैमाने पर हीरे और गहनों का निर्यात करते हैं। शुल्क बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय गहने महंगे हो जाएंगे, जिससे मांग में भारी गिरावट आ सकती है।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उपकरण:
भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि पर शुल्क बढ़ने से न केवल निर्यात प्रभावित होगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति भी कमजोर पड़ सकती है।
4. समुद्री और कृषि उत्पाद:
झींगा (श्रिंप), मछली, मसाले और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में बढ़ जाएंगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
5. फार्मास्युटिकल्स:
भले ही अभी दवाओं को इस टैरिफ से छूट मिली हो, लेकिन भविष्य में सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के नाम पर शुल्क लगाए जा सकते हैं। इससे इस क्षेत्र की निर्यात ग्रोथ पर ब्रेक लग सकता है।
आम आदमी पर असर
इस फैसले के बाद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है और ₹87 प्रति डॉलर के स्तर को छू चुका है। इससे पेट्रोलियम, आयातित गैजेट्स और आवश्यक वस्तुएं महंगी होंगी, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ेगा।
भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी?
सरकार ने फिलहाल संयमित रुख अपनाते हुए कहा है कि वह इस फैसले का अध्ययन कर रही है और जल्द ही रणनीतिक कदम उठाएगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘चाइना +1’ रणनीति पर तेजी से काम करने की जरूरत है ताकि वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह टैरिफ फैसला सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार, रुपये की कीमत और आम नागरिकों के जीवन स्तर तक पहुंचने वाला है। यदि भारत समय रहते अपनी नीतियों में सुधार नहीं करता, तो यह शुल्क भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।

Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।