वॉशिंगटन: ईरान के साथ 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए लगभग 1,000 सेमी-ऑटोनॉमस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (CCA) तैनात करने की योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। ये अत्याधुनिक मानवरहित लड़ाकू विमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से संचालित होंगे और मानव पायलट वाले फाइटर जेट्स के साथ मिलकर मिशन को अंजाम देंगे। अमेरिका का मानना है कि आने वाले वर्षों में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है, जहां इंसानों और मशीनों की संयुक्त ताकत निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी सोच के तहत अमेरिकी वायुसेना ने अपने “नेक्स्ट जेनरेशन एयर कॉम्बैट” कार्यक्रम को गति दी है।
दो रक्षा कंपनियों को मिला अरबों डॉलर का मौका
अमेरिकी वायुसेना ने पहले चरण के CCA प्रोग्राम के तहत रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जनरल एटॉमिक्स और एंडुरिल इंडस्ट्रीज को उत्पादन अनुबंध सौंपे हैं। जनरल एटॉमिक्स FQ-42A और एंडुरिल FQ-44A मॉडल विकसित करेगी। वायुसेना अधिकारियों के मुताबिक दोनों कंपनियों ने तय समयसीमा से चार महीने पहले ही मिशन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया, जिससे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया।
AI होगा सबसे बड़ा हथियार
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत इसका मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर है। अमेरिकी वायुसेना ने इसके विकास के लिए छह प्रमुख रक्षा एवं तकनीकी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें एंडुरिल, जनरल एटॉमिक्स, Lockheed Martin, Northrop Grumman, RTX Collins Aerospace और Shield AI शामिल हैं। इन कंपनियों द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर एयरक्राफ्ट को दुश्मन की गतिविधियों का विश्लेषण करने, खतरे पहचानने और रियल टाइम में निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा। इससे पायलटों का जोखिम कम होगा और ऑपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ेगी।
15 महीने में टेस्टिंग से प्रोडक्शन तक
जनरल एटॉमिक्स ने दावा किया है कि उसके YFQ-42A प्रोटोटाइप ने अगस्त 2025 में पहली उड़ान भरी थी और केवल 15 महीनों के भीतर परियोजना परीक्षण चरण से उत्पादन स्तर तक पहुंच गई। कंपनी के अनुसार एयरक्राफ्ट को मॉड्यूलर डिजाइन पर तैयार किया गया है, जिससे इसे अलग-अलग मिशनों के अनुरूप आसानी से संशोधित किया जा सकेगा। यह निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, लक्ष्य भेदन और एयर सपोर्ट जैसे कई कार्य कर सकेगा।
दशक के अंत तक 150 विमान, लक्ष्य 1,000 का
अमेरिकी वायुसेना ने प्रारंभिक लक्ष्य के रूप में दशक के अंत तक 150 से अधिक कॉम्बैट-रेडी एयरक्राफ्ट तैनात करने की योजना बनाई है। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वायुसेना प्रमुख जनरल केन विल्सबाख ने कहा कि यह तकनीक अमेरिका को उन युद्ध क्षेत्रों में भी बढ़त दिलाएगी जहां पारंपरिक लड़ाकू विमान भेजना जोखिम भरा होता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में मानव और AI संचालित मशीनों की साझेदारी ही जीत का आधार बनेगी।
बदल रही है वैश्विक सैन्य रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम दुनिया में सैन्य तकनीक की नई दौड़ को जन्म दे सकता है। चीन, रूस और कई यूरोपीय देश पहले से ही AI आधारित ड्रोन और स्वायत्त लड़ाकू प्रणालियों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का 1,000 AI-संचालित लड़ाकू विमानों का लक्ष्य वैश्विक रक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







