महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर तेज हुई सियासत, किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा पत्र

नई दिल्ली: देश में महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर विपक्ष से विधेयक के पारित होने में रचनात्मक सहयोग देने की अपील की है। यह पत्र खरगे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग किए जाने के बाद सामने आया है।

सरकार का दावा- विपक्ष से बातचीत की कोशिश की

रिजिजू ने अपने पत्र में कहा कि सरकार ने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव पर विपक्षी दलों के साथ संवाद करने के प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर खरगे को 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को पत्र लिखे गए थे। मंत्री के अनुसार, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी विपक्षी नेताओं से चर्चा कर सहयोग मांगा था।

अप्रैल में लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था विधेयक

महिला आरक्षण और लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर सका था। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हुआ। प्रस्ताव में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने और 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था। इसके साथ ही परिसीमन से संबंधित अन्य विधायी प्रस्ताव भी सरकार की योजना का हिस्सा थे। आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संबंधित अन्य विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया।

2023 में पारित हो चुका है महिला आरक्षण कानून

संसद ने वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इसके लागू होने की प्रक्रिया जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ी हुई है। इसी वजह से महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। सरकार का प्रस्ताव लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से जुड़ा रहा है, जबकि विपक्ष के कई दल मौजूदा सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग कर चुके हैं।

कांग्रेस की मांग और परिसीमन पर विवाद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर संसद में विचार किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंता यह है कि परिसीमन की प्रक्रिया से अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

कुछ विपक्षी दलों ने यह भी कहा है कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि इस विषय पर विभिन्न दलों के साथ बातचीत की गई है और अब विधायी प्रक्रिया में सहयोग की जरूरत है।

अब आगे क्या होगा?

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार तथा विपक्ष के बीच संवाद और राजनीतिक सहमति का मुद्दा फिर चर्चा में है। रिजिजू के पत्र से स्पष्ट है कि सरकार विपक्षी दलों से प्रस्ताव पर सहयोग चाहती है, जबकि कांग्रेस ने पहले ही व्यापक चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग उठाई है।

आगे इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह सरकार की संसदीय रणनीति, विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित विधेयक के स्वरूप पर निर्भर करेगा। फिलहाल महिला आरक्षण को लागू करने की समयसीमा और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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