भावा में 16 दिवसीय वैदिक शिविर का ऐतिहासिक समापन; महायज्ञ के बीच 50 बटुकों ने धारण किया यज्ञोपवीत

संत ज्ञानानंद जी व अवधूत शरण जी महाराज का मिला दिव्य सान्निध्य

वैदिक मंत्रोच्चार और आचार्यों के उद्बोधन से गुंजायमान हुआ पंडाल

कुंवारिया (राजसमंद)। श्री महर्षि वेद व्यास सनातन वैदिक शिक्षण सेवा संस्थान के तत्वाधान में ग्राम भावा स्थित नोबल पब्लिक स्कूल परिसर में संचालित 16 दिवसीय ‘पंचम वैदिक संस्कार शिविर’ का बुधवार को ऐतिहासिक महायज्ञ, सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार और भव्य समारोह के साथ समापन हुआ। इस दिव्य महाआयोजन की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक ओम प्रकाश शर्मा ने की। कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों और जिलों से आए सैकड़ों अभिभावकों तथा गणमान्य नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

पहले संपन्न हुआ पावन यज्ञोपवीत संस्कार

प्रातः ठीक 8:00 बजे कार्यक्रम का शंखनाद हुआ। सर्वप्रथम, आचार्यों के सान्निध्य में पवित्र महायज्ञ वेदी पर आहुतियां दी गईं, जिसके अंतर्गत 50 बटुकों का सामूहिक उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। बटुकों द्वारा जनेऊ धारण करने के इस मुख्य धार्मिक अनुष्ठान के पूर्ण होने के पश्चात भव्य समापन समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ।

मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से आगाज

समापन सत्र की शुरुआत मुख्य अतिथि परम पूज्य संत श्री 1008 ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज एवं अति विशिष्ट अतिथि संत श्री अवधूत शरण जी महाराज के दिव्य सान्निध्य में हुई। अतिथियों में मुरली मनोहर व्यास, पूर्णेश पारीक, लीलाधर पालीवाल, नंदलाल पालीवाल, भरत खण्डेलवाल, मीना देवी, डिंपल पंचोली, प्रवीण गुर्जर, प्रकाश पारीक, गोविंद शर्मा, दीपक शर्मा, पुरण शर्मा, राधेश्याम एवं भगवतीलाल शामिल रहे। सभी ने भगवान वेदव्यास एवं माता सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन व पूजन किया। वैदिक रीति से मंगलाचरण के बाद आचार्य पवन व गणपति ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच का कुशल संचालन आचार्य प्रहलाद तिवारी द्वारा किया गया।

ओजस्वी उद्बोधन में गूंजा वेदों का महात्म्य

बौद्धिक सत्र में ‘गौतम कक्ष’ के मेधावी छात्रों ने ‘पुरुष सूक्त’ का सस्वर वाचन किया, जिसके बाद आचार्य गणपति ने संस्था का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात आचार्यों ने अपने ज्ञानवर्धक विचारों से बटुकों का मार्गदर्शन किया:

आचार्य विकास पारीक ने यज्ञोपवीत संस्कार के महात्म्य पर विस्तृत चर्चा की।

आचार्य गिरीश त्रिवेदी ने सनातन संस्कृति में ब्राह्मण वर्ण के कर्तव्यों एवं वेदों के महत्व पर प्रकाश डाला।

आचार्य हरिप्रसाद ने वर्तमान समय में वैदिक ज्ञान की महती आवश्यकता और इसकी व्यावहारिक उपयोगिता को स्पष्ट किया।

कोषाध्यक्ष ने रखा पारदर्शी आय-व्यय का लेखा-जोखा

समारोह के दौरान संस्थान के कोषाध्यक्ष पवन तिवारी ने पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ संस्था का वार्षिक आय-व्यय प्रतिवेदन मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन को सबके सामने रखते हुए भामाशाहों और समाज द्वारा दिए गए सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आगामी प्रकल्पों के लिए भी सहयोग की विनम्र अपील की।

संतों की वाणी: गुरु महिमा और त्याग की दी सीख

मुख्य अतिथि संत श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने आशीष वचनों में यज्ञोपवीत के महत्व एवं सनातन संस्कृति में गुरु की उपयोगिता को सर्वोपरि बताया। वहीं, अति विशिष्ट अतिथि संत श्री अवधूत शरण जी महाराज ने भावपूर्ण गुरु वंदना के साथ बटुकों को जीवन में त्याग, समर्पण और निष्ठा के भावों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। संतों ने सभी बटुकों को नियमित स्वाध्याय करने तथा शिविर में सीखे गए ज्ञान को रोज़मर्रा के जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।

आचार्य, अतिथि एवं भामाशाहों का भव्य सम्मान

संस्था के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने अतिथि, भामाशाह एवं आचार्य सम्मान के विषय पर चर्चा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात पूज्य संतों व अतिथियों के कर-कमलों द्वारा शिविर में निशुल्क सेवाएं देने वाले देश के कोने-कोने से आए विद्वान आचार्यों, सहयोग करने वाले भामाशाहों और अतिथियों का शॉल व स्मृति चिह्न भेंट कर भव्य सम्मान किया गया। दोपहर 12:00 बजे महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ इस अलौकिक आध्यात्मिक सत्र का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

इस अवसर पर यह रहे उपस्थित:

समारोह में संस्था के ओम प्रकाश शर्मा, गोविंद शर्मा, विष्णु शर्मा, पवन तिवारी, हरिप्रसाद, विकास पारीक, गिरीश त्रिवेदी, प्रहलाद तिवारी, गणपति, पवन सहित सक्रिय सदस्य हरीश पालीवाल, किशन पालीवाल, राहुल शर्मा, पवन पालीवाल, राजेश पारीक, पूर्णेश पारीक, मयंक पालीवाल, यशवंत शर्मा, नंदलाल शर्मा सहित संस्थान के समस्त कार्यकर्ता, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Author: PRADEEP SOLANKI

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