जयपुर: राजस्थान में भजनलाल सरकार पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के फैसलों को लगातार पलट रही है। 9 नए जिलों और 3 संभागों को रद्द करने के बाद, अब सरकार ने मेडिकल कॉलेजों पर ध्यान केंद्रित किया है। गहलोत सरकार के कार्यकाल में जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले गए या निर्माणाधीन थे, उनमें से कई का काम रोक दिया गया है। राजस्थान के जालौर मेडिकल कॉलेज में भवन निर्माण का कार्य पिछले साल शुरू हुआ था, जिसे अब रोक दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, 15 जनवरी से यह निर्माण कार्य ठप पड़ा है।
जालौर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य रुका
पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने जालौर में मेडिकल कॉलेज के लिए काम शुरू करवाया था। राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (RSRDC) ने एसकेएस करकाला इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को निर्माण का ठेका दिया था। पिछले एक साल से कॉलेज का प्रशासनिक भवन बन रहा था। 15 जनवरी 2025 को अचानक काम रोकने के आदेश जारी कर दिए गए। अब सवाल यह है कि ठेकेदार कंपनी को भुगतान कैसे और कितना किया जाएगा। इस पर स्थिति साफ नहीं है।
स्टाफ की कमी बनी बड़ी चुनौती
गहलोत सरकार के कार्यकाल में कई जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हुए, लेकिन उनमें से अधिकांश में स्टाफ की भारी कमी पाई गई। झालावाड़ सहित 12 मेडिकल कॉलेज ऐसे हैं जहां स्टाफ संकट गंभीर है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कई कॉलेजों का निरीक्षण किया और कमियों की ओर इशारा किया।
13 कॉलेजों को NMC ने दिया था नोटिस
पिछले साल नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 13 मेडिकल कॉलेजों को नोटिस जारी किया था। कॉलेजों से पूछा गया था कि यूजी इंटर्न, पीजी रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट को मानदेय कैसे और कितना दिया जाएगा। नोटिस पाने वाले कॉलेजों में जेएन मेडिकल कॉलेज अजमेर और आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर शामिल हैं। इसके अलावा दौसा, अलवर, हनुमानगढ़, चित्तौड़गढ़, गंगानगर, धौलपुर, चूरू, बाड़मेर, डूंगरपुर और भरतपुर के कॉलेजों को भी नोटिस मिला।
राजनीतिक विवाद
भजनलाल सरकार के इन कदमों ने विपक्ष को आक्रामक कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भजनलाल सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है: “यह फैसला छात्रों और मरीजों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। गहलोत सरकार ने हर जिले में मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने का सपना देखा था, लेकिन मौजूदा सरकार इसे खत्म कर रही है।”
भजनलाल सरकार का रुख
वहीं, भजनलाल सरकार का तर्क है कि: गहलोत सरकार की योजनाएं बिना वित्तीय योजना के लागू की गईं। कई मेडिकल कॉलेज सुविधाओं और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। निकायों के निरस्तीकरण और अब मेडिकल कॉलेजों पर रोक के साथ, राज्य में भजनलाल और गहलोत सरकार के बीच तनाव बढ़ गया है। इन फैसलों का असर न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरण भी बदल सकता है।
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