जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े कथित हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित कई अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। एसीबी की चार्जशीट और प्रारंभिक जांच के आधार पर संकेत मिले हैं कि यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होते हैं, तो पूर्व मंत्री महेश जोशी, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल और अन्य आरोपियों को अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
महेश जोशी से 8 घंटे तक पूछताछ
एसीबी की विशेष जांच टीम (SIT) ने शुक्रवार को पूर्व मंत्री महेश जोशी से करीब आठ घंटे तक लंबी पूछताछ की। जांच का मुख्य केंद्र ‘इरकोन’ कंपनी द्वारा भेजी गई एक गोपनीय ई-मेल रही, जिसमें कथित फर्जीवाड़े और ठेकेदारों की अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी। सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारियों ने जोशी से पूछा कि जब विभाग को पहले ही संभावित गड़बड़ी की चेतावनी मिल चुकी थी, तब संबंधित कमेटी के गठन और प्रक्रिया को मंजूरी क्यों दी गई। इस पर महेश जोशी ने कथित तौर पर जवाब दिया कि विभागीय अधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर ही फाइल को आगे बढ़ाया गया था।
गोपनीय ई-मेल लीक होने पर भी सवाल
पूछताछ के दौरान एसीबी ने यह भी जानने की कोशिश की कि गोपनीय ई-मेल की जानकारी विभाग से बाहर ठेकेदारों तक कैसे पहुंची। इस सवाल पर जोशी ने कहा कि ई-मेल की जानकारी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी थी, इसलिए सूचना लीक होने का स्रोत कोई भी हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक रिश्वत नेटवर्क और बिचौलियों की भूमिका से जुड़े कई सवालों पर पूर्व मंत्री ने चुप्पी साध ली या अनभिज्ञता जताई।
संजय बड़ाया पर जांच एजेंसियों की नजर
एसीबी की जांच में संजय बड़ाया का नाम पूरे मामले की अहम कड़ी के रूप में सामने आया है। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि वह जलदाय विभाग के अधिकारियों, ठेकेदारों और कथित रिश्वत नेटवर्क के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार बड़ाया फिलहाल विदेश में है और उसके भारत लौटने का इंतजार किया जा रहा है। एसीबी को उम्मीद है कि उसकी पूछताछ से पूरे “कैश ट्रेल” और कथित लेन-देन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
11 मई तक एसीबी रिमांड
गुरुवार को हिरासत में लिए जाने के बाद अदालत ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को 11 मई तक एसीबी रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी के सुपरविजन अधिकारी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में SIT मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के वर्क ऑर्डर कैसे जारी किए गए और गोपनीय चेतावनियों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल
JJM घोटाले की जांच तेज होने के बाद राजस्थान के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। विपक्ष लगातार सरकार और पूर्व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां अब दस्तावेजों, फाइल मूवमेंट और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







