नई दिल्ली। अमेरिका में H1-B वीजा के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर H-1B वीजा के नए आवेदन के लिए सालाना $100,000 (करीब ₹88 लाख) फीस अनिवार्य कर दी है। यह नियम नए आवेदन के साथ-साथ मौजूदा H-1B धारकों पर भी लागू होगा।
नए आदेश के तहत अब किसी भी H-1B वीजा आवेदन को प्रोसेस करने के लिए नियोक्ताओं को इस शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य होगा। राज्य सचिव यह पुष्टि करेंगे कि आवेदन शुल्क अदा किया गया है या नहीं। यदि भुगतान नहीं किया गया, तो याचिका को अस्वीकार किया जा सकता है, केवल राष्ट्रीय हित में या विशेष अपवादों में ही इसे मंजूरी दी जा सकती है।
किस पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों को मिलता है। पिछले साल 71% H-1B वीजा धारक भारत से थे, जबकि चीन दूसरे स्थान पर था। मुख्य रूप से यह नियम आईटी सेक्टर के पेशेवरों, सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, टेक प्रोग्राम मैनेजर और अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक करने वाले भारतीय छात्रों को प्रभावित करेगा। अधिकांश भारतीय H-1B धारक STEM क्षेत्रों में काम करते हैं और इनका औसत वेतन $118,000 प्रति वर्ष है।
नियम पेश करने का कारण
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह नियम H-1B वीजा के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के लिए है। उच्च आवेदन शुल्क कंपनियों को अमेरिकी श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगा और विदेशी श्रमिक केवल तभी नियुक्त होंगे जब वास्तव में आवश्यकता होगी। हालांकि, आलोचक मानते हैं कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ग्लोबल प्रतिभा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर भारत और चीन के श्रमिकों पर।
H-1B धारकों के लिए आगे क्या होगा?
अमेरिका हर साल लॉटरी प्रणाली के जरिए 85,000 H-1B वीजा जारी करता है। नए नियम से कई मौजूदा और नए वीजा धारक वित्तीय दबाव में आ सकते हैं। अगर कंपनियां शुल्क का भुगतान नहीं करती हैं, तो कई पेशेवरों को नौकरी के अवसर खोने या अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। भारतीय छात्रों और हाल के स्नातकों के लिए यह नौकरी के अवसर कम, वित्तीय दबाव अधिक और अमेरिका में काम करने के सीमित अवसर का संकेत देता है। H-1B वीजा अस्थायी होता है (अधिकतम छह साल के लिए वैध) और कई धारक इसे स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए मार्ग के रूप में उपयोग करते हैं। नया शुल्क इस प्रक्रिया को धीमा या अवरुद्ध कर सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। यह कदम H-1B वीजा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है और भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक और करियर चुनौतियां ला सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







