ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान से बवाल: नूक की सड़कों पर उतरे हजारों लोग, अमेरिका के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

ग्रीनलैंड एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने संबंधी बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान के विरोध में ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका की मंशा के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन किया।


ग्रीनलैंड में जनता का विरोध प्रदर्शन

शनिवार को हुए इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने किया। प्रदर्शन में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों नागरिक शामिल हुए, जिनके हाथों में बैनर और झंडे थे। इन पर ग्रीनलैंड की संप्रभुता और आत्मनिर्णय की मांग लिखी हुई थी।
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कांसुलेट की ओर मार्च करते हुए नारे लगाए—“ग्रीनलैंड का भविष्य, ग्रीनलैंड तय करेगा।” लोगों का साफ कहना था कि किसी भी बाहरी ताकत को द्वीप के राजनीतिक और सांस्कृतिक फैसलों में दखल देने का अधिकार नहीं है।


अमेरिका का रणनीतिक तर्क और ट्रंप का बयान

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी यह कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। उनका तर्क है कि इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और यहां मौजूद खनिज संसाधन अमेरिकी हितों से सीधे जुड़े हैं। ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया था कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी बयान के बाद ग्रीनलैंड और डेनमार्क में चिंता बढ़ गई। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क का हिस्सा है, हालांकि उसे आंतरिक मामलों में व्यापक स्वायत्तता प्राप्त है।


नाटो सहयोगियों में बढ़ता राजनीतिक तनाव

ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों से अमेरिका और डेनमार्क के बीच कूटनीतिक तनाव साफ नजर आने लगा है। दोनों ही देश नाटो के सदस्य हैं, ऐसे में यह विवाद गठबंधन के भीतर असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
डेनमार्क ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए नाटो की मौजूदगी को और मजबूत करेगा। वहीं कई यूरोपीय देशों ने ट्रंप के बयान की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। यूरोपीय संघ की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जिसमें उर्सुला वॉन डेर लेयेन जैसे शीर्ष नेताओं ने आर्कटिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।


आर्कटिक में तेज होती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

इस पूरे घटनाक्रम ने आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। ग्रीनलैंड के नागरिकों का साफ संदेश है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं और अपने भविष्य का फैसला खुद करना चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक मंच पर और बड़ा रूप ले सकता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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