भगवान के प्रसाद में भी घोटाला! भरतपुर के मंदिरों में बांटी गई घटिया मिठाई, फर्म ब्लैकलिस्ट

राजस्थान के Bharatpur संभाग में देवस्थान विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां दीपावली पर मंदिरों में भेजी गई भोग-प्रसादी की गुणवत्ता खराब पाई गई। जांच में मिठाई के सैंपल फेल होने के बाद विभाग ने संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जानकारी के अनुसार, देवस्थान विभाग की ओर से आत्मनिर्भर श्रेणी के 57 मंदिरों में दीपावली के अवसर पर प्रसादी भेजी गई थी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मंदिर के लिए करीब 2 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।

आधा सामान और खराब गुणवत्ता

आरोप है कि ठेकेदार ने तय मात्रा और गुणवत्ता का पालन नहीं किया। जहां प्रत्येक मंदिर के लिए 30 किलो मिठाई भेजी जानी थी, वहां कई मंदिरों में केवल 15 किलो मिठाई ही पहुंचाई गई। इसके अलावा मिठाई की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि कई मंदिरों के पुजारियों ने इसे लेने से ही मना कर दिया।

जांच में फेल हुए सैंपल

जांच में सामने आया कि 718 रुपये प्रति किलो की दर से सप्लाई की गई मिठाई के सैंपल फेल हो गए। जबकि बाजार में इसी तरह की मिठाई 200-250 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध होती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कीमतों में भी गड़बड़ी की गई। नियमों के अनुसार, प्रसादी सप्लाई करने से पहले फर्म को खाद्य विभाग से गुणवत्ता प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है और वितरण के समय वीडियोग्राफी भी अनिवार्य होती है। लेकिन संबंधित फर्म ने इन नियमों का पालन नहीं किया और सीधे मंदिरों में प्रसादी पहुंचा दी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए। जांच में दोषी पाए जाने पर फर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

हर साल उठते हैं सवाल

देवस्थान विभाग में इस तरह की गड़बड़ियां पहली बार नहीं सामने आई हैं। इससे पहले भी प्रसादी और अन्य व्यवस्थाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। पिछले साल भी इसी तरह के मामलों की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन कार्रवाई सीमित ही रही। खराब सामग्री के कारण कई मंदिरों में गोवर्धन पूजा के दौरान अन्नकूट का आयोजन भी नहीं हो पाया। इससे श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली।

अधिकारियों का बयान

देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मिठाई और अन्य सामग्री के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, जो फेल पाए गए। इसके बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर मंदिरों से जुड़े बजट और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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