पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए ‘महा-परिवर्तन’ का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। 15 साल पुराने ममता बनर्जी सरकार के शासन के खात्मे और राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के साथ ही कोलकाता का पॉश इलाका कालीघाट, जो कभी सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र था, अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
कालीघाट का बदला नजारा: ‘शांति निकेतन’ से हटी पाबंदियां
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांति निकेतन 188’ के आसपास का माहौल पूरी तरह बदल गया है।
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सुरक्षा घेरा कम: पिछले कई सालों से इस आवास के चारों ओर रहने वाली त्रि-स्तरीय सुरक्षा, पुलिस पोस्ट और लोहे के बैरिकेड्स अब हटा लिए गए हैं।
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रास्तों पर राहत: सुरक्षा कारणों से जो सड़क एक लेन तक सीमित कर दी गई थी, उसे अब आम जनता के लिए खोल दिया गया है। लोगों की आवाजाही पर रखी जाने वाली कड़ी निगरानी और पूछताछ का दौर भी अब खत्म हो गया है।
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ममता बनर्जी की सुरक्षा: निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी वापस बुला लिया गया है।
DGP की सफाई: “सुरक्षा में कटौती नहीं, प्रोटोकॉल का पालन”
सुरक्षा हटाए जाने की चर्चाओं के बीच पश्चिम बंगाल के DGP सिद्धार्थ नाथ गुप्ता ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा: “ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों को Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। ‘येलो बुक’ के अनुसार इस श्रेणी के लिए जितनी फोर्स की आवश्यकता होती है, वह पूरी तरह बरकरार है। केवल उस ‘अतिरिक्त बल’ को हटाया गया है जो प्रोटोकॉल से ज्यादा तैनात था। इस फोर्स का उपयोग अब राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।”
भाजपा का 3 से 207 सीटों तक का जादुई सफर
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ऐतिहासिक है। 1972 के बाद यह पहली बार है जब बंगाल में वही पार्टी शासन करेगी जो केंद्र में भी है।
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सीटों का गणित: भाजपा ने 130 सीटों का भारी लाभ कमाते हुए 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं टीएमसी को 135 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
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भवानीपुर का महासंग्राम: सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर हुआ, जहां सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से शिकस्त दी। सुवेंदु को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी 58,812 वोटों पर सिमट गईं।
नया इतिहास और शपथ ग्रहण की तैयारी
भाजपा के वरिष्ठ नेता समिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। बंगाल के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि राज्य की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढांचे में भी एक बड़े फेरबदल की शुरुआत है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








