थलपति विजय और कांग्रेस के बीच गठबंधन तय, राज्यपाल से मिले नेता; DMK ने कहा- “पीठ में छुरा घोंपा”

तमिलनाडु की सियासत में दशकों पुराना ‘द्रविड़ मॉडल’ ताश के पत्तों की तरह ढह गया है। अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) की धमाकेदार जीत के बाद अब सरकार गठन की कवायद तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा चौंकाने वाला मोड़ कांग्रेस ने लिया है, जिसने अपने दशकों पुराने साथी DMK का दामन झटक कर विजय के साथ हाथ मिला लिया है।

सत्ता का नया समीकरण: 113 पर पहुंचा गठबंधन

तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। नए गठबंधन के बाद आंकड़ों का गणित अब इस प्रकार है:

  • TVK (विजय की पार्टी): 108 सीटें

  • कांग्रेस: 5 सीटें

  • कुल योग: 113 सीटें (बहुमत से मात्र 5 दूर)

इस 5 सीटों की कमी को पूरा करने के लिए TVK नेतृत्व अब AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी (EPS) के संपर्क में है, जिनकी पार्टी के पास 47 सीटें हैं। सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करने के लिए तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई और प्रभारी गिरीश चोडंकर ने विजय के साथ मुलाकात की और बाद में राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से राजभवन में भेंट की।

कांग्रेस का पलटवार: “गठबंधन टूटना एक स्वाभाविक प्रक्रिया”

DMK द्वारा लगाए जा रहे ‘धोखे’ के आरोपों पर कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एमके स्टालिन की पार्टी को आईना दिखाते हुए 2014 के लोकसभा चुनावों की याद दिलाई। “राजनीति में गठबंधन स्थायी नहीं होते। 2014 में चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले DMK ने हमें बाहर का रास्ता दिखाया था, तब हमने अकेले चुनाव लड़ा था। आज जब स्टालिन हार गए हैं, तो हम उन पर निजी टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं है। राहुल गांधी को किसी से ‘अच्छे आचरण’ के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।”

DMK में उबाल: “INDIA गठबंधन की पीठ में छुरा घोंपा”

कांग्रेस के इस अप्रत्याशित यू-टर्न से DMK खेमे में भारी आक्रोश है। पार्टी नेता सरवनन अन्नादुरई ने इसे विश्वासघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला बिना दूरदर्शिता वाला है, जिससे 2029 के आम चुनाव में उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। DMK का मानना है कि ‘INDIA’ ब्लॉक के एक प्रमुख साथी का इस तरह पाला बदलना गठबंधन की एकता के लिए घातक है।

 विजय युग की शुरुआत

तमिलनाडु अब एक नए राजनीतिक युग में प्रवेश कर चुका है। थलपति विजय की एंट्री ने न केवल स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK को सत्ता से बाहर किया है, बल्कि राज्य की द्विध्रुवीय (Bipolar) राजनीति को भी खत्म कर दिया है। अब सबकी नजरें AIADMK के रुख पर टिकी हैं, जो इस नई सरकार के गठन में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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