राजस्थान की सबसे चर्चित और विवादों में घिरी सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 20 मई 2026 को आए इस आदेश ने भर्ती प्रक्रिया की दिशा ही बदल दी है। हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को उन अभ्यर्थियों को भी पुनः परीक्षा में शामिल करने का निर्देश दिया है, जो वर्ष 2021 में आयोजित मुख्य परीक्षा के दोनों पेपर नहीं दे पाए थे।
जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा समेत अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आरपीएससी को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को पोर्टल पर आवेदन फॉर्म एडिट करने का मौका दिया जाए और उन्हें प्रोविजनल तौर पर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। कोर्ट के इस फैसले के बाद हजारों अभ्यर्थियों में राहत और खुशी का माहौल है।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, आरपीएससी ने 8 मई 2026 को जारी अपने प्रेस नोट में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म में संशोधन करने की अनुमति दी थी, जिन्होंने सितंबर 2021 में आयोजित मुख्य परीक्षा के दोनों पेपर दिए थे। आयोग ने 16 मई से 30 मई 2026 तक फॉर्म एडिट की सुविधा शुरू की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने भर्ती के लिए आवेदन किया था और फीस भी जमा की थी, लेकिन व्यक्तिगत कारणों से परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। उनका कहना था कि जब पूरी भर्ती को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जा रही है, तो सभी पंजीकृत अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
RPSC की दलीलें कोर्ट ने खारिज कीं
सुनवाई के दौरान आरपीएससी ने कोर्ट को बताया कि यदि सभी पुराने आवेदकों को दोबारा मौका दिया गया, तो लगभग 4 लाख अतिरिक्त अभ्यर्थियों की जांच और दस्तावेज सत्यापन करना मुश्किल हो जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि कई अभ्यर्थी अब नौकरी या अन्य क्षेत्रों में जा चुके होंगे। हालांकि हाईकोर्ट ने आयोग की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक कठिनाइयों का हवाला देकर अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता।
वकीलों ने दी पुरानी भर्तियों की मिसाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। उन्होंने EO-RO भर्ती और LDC भर्ती के उदाहरण पेश किए, जहां भर्ती रद्द होने के बाद सभी आवेदकों को दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका दिया गया था। वकीलों ने कहा कि SI भर्ती में अलग नियम लागू करना दोहरा मापदंड अपनाने जैसा है।
SI भर्ती 2021 के आंकड़े
| विवरण | अभ्यर्थियों की संख्या |
|---|---|
| कुल आवेदन करने वाले अभ्यर्थी | लगभग 7.95 लाख |
| दोनों पेपर देने वाले अभ्यर्थी | 3,83,097 |
| परीक्षा में अनुपस्थित अभ्यर्थी | 4,11,903 |
| पहले RPSC द्वारा अनुमति प्राप्त अभ्यर्थी | केवल 3.83 लाख |
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
SI भर्ती-2021 पेपर लीक और डमी कैंडिडेट विवाद के कारण लंबे समय से अदालतों में चल रही है।
- 28 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने भर्ती रद्द करने का आदेश दिया था।
- 4 अप्रैल 2026 को डिवीजन बेंच ने भी भर्ती रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा।
- 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने चयनित प्रशिक्षु SI की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद दोबारा परीक्षा का रास्ता साफ हुआ।
अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी खुल सकते हैं रास्ते
हालांकि फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाकी 4 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों को भी राहत मिल सकती है। अब आरपीएससी को अपने ऑनलाइन पोर्टल में बदलाव कर कोर्ट के आदेशानुसार अभ्यर्थियों को आवेदन संशोधन का मौका देना होगा। बेरोजगार युवाओं के लिए यह फैसला बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
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Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।







