तमिलनाडु में C. Joseph Vijay के मुख्यमंत्री बनने के महज एक हफ्ते के भीतर ही सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार की खबरें सामने आने लगी हैं। टीवीके (TVK) सरकार के सहयोगी दलों ने संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है। खासतौर पर Communist Party of India (Marxist) यानी CPI(M) ने AIADMK को सरकार में शामिल किए जाने की अटकलों पर खुली चेतावनी दे दी है।
AIADMK को लेकर शुरू हुआ नया विवाद
तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तब तेज हुई जब यह चर्चा सामने आई कि विजय अपनी सरकार को स्थिर और मजबूत बनाने के लिए All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) को भी साथ ला सकते हैं। इस संभावना ने सहयोगी दलों खासकर लेफ्ट पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है। सीपीआई(एम) के राज्य सचिव P. Shanmugam ने साफ शब्दों में कहा कि अगर AIADMK को कैबिनेट में जगह दी जाती है तो लेफ्ट पार्टियां सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार कर सकती हैं।
‘कैबिनेट में AIADMK आई तो समर्थन पर पुनर्विचार’
पत्रकारों से बातचीत में पी षणमुगम ने कहा कि AIADMK को सत्ता में हिस्सेदारी देना उनके राजनीतिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि लेफ्ट पार्टियां और Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) ने बाहर से समर्थन देने का फैसला पहले ही कर लिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर VCK भविष्य में सरकार में शामिल होना चाहती है तो वह उसका राजनीतिक फैसला होगा। लेफ्ट दलों और VCK के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं।
‘परिवार की तरह काम करे कैबिनेट’ : TVK
वहीं दूसरी ओर टीवीके सरकार की तरफ से सहयोगी दलों को साधने की कोशिश भी जारी है। टीवीके मंत्री Aadhav Arjuna ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय चाहते हैं कि पूरी कैबिनेट “एक परिवार” की तरह काम करे। उन्होंने कहा कि जो दल सरकार को समर्थन दे रहे हैं, उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री जल्द फैसला ले सकते हैं। टीवीके नेताओं ने इस दौरान Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और AIADMK दोनों पर हमला बोला। आरोप लगाया गया कि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों ने मिलकर नई सरकार को अस्थिर करने और राष्ट्रपति शासन लगवाने की कोशिश की थी। हाल ही में विजय सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया था। TVK सरकार को कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK, IUML और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन मिला था। फ्लोर टेस्ट में सरकार के पक्ष में कुल 144 वोट पड़े थे।
शुरुआती दौर में ही गठबंधन की परीक्षा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय सरकार को सत्ता के शुरुआती दौर में ही गठबंधन संतुलन की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लेफ्ट पार्टियां AIADMK को लंबे समय से अपनी वैचारिक विरोधी मानती रही हैं, जबकि TVK व्यापक गठबंधन बनाकर सरकार को दीर्घकाल तक स्थिर रखना चाहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार और सहयोगी दलों के बीच तालमेल तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








