Ashok Gehlot ने शनिवार को राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आक्रामक तेवर दिखाते हुए Bhajan Lal Sharma सरकार पर एक साथ कई बड़े मुद्दों को लेकर हमला बोला। पूर्व मुख्यमंत्री ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, ग्राम विकास चौपाल, पंचायत चुनाव और NEET Exam पेपर लीक मामले को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। गहलोत के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में नया सियासी संग्राम शुरू हो गया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना
गहलोत ने राजस्थान में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों को लेकर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाने पर राज्य सरकार को वैट के जरिए अतिरिक्त राजस्व मिलता है, जबकि आम जनता और किसान महंगाई की मार झेलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजल महंगा होने से किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है और ट्रैक्टर, सिंचाई व खेती से जुड़े खर्चों में इजाफा हो रहा है। पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा वैट कम करने की मांग करती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार चुप है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पेट्रोल-डीजल पर वैट और रोड सेस घटाने की मांग की।
‘ग्राम विकास चौपाल’ को बताया छवि चमकाने का अभियान
गहलोत ने राज्य सरकार की ‘ग्राम विकास चौपाल’ और ‘ग्राम विकास रथ’ योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों को जनता की समस्याएं सुनने के बजाय सरकार की छवि चमकाने का माध्यम बना दिया गया है। उनका कहना था कि चौपालों में सभी ग्रामीणों को बुलाने के बजाय सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं और योजनाओं के लाभार्थियों को आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि सरकार की आलोचना सामने न आए। उन्होंने दावा किया कि गांवों में विकास रथों का विरोध हो रहा है और सरकार के अभियान जनता का भरोसा जीतने में विफल साबित हो रहे हैं।
पंचायत चुनाव टालने पर हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र
पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी गहलोत ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार जनता का सामना करने से बच रही थी और इसी वजह से चुनाव लगातार टाले जा रहे थे। गहलोत ने Rajasthan High Court के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें 31 जुलाई 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव टालने के लिए कभी गर्मी, कभी बारिश और कभी स्कूल सत्र का बहाना बनाया। गहलोत ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि अब सरकार को जनता के बीच जाना ही पड़ेगा।
NEET पेपर लीक मामले पर सबसे बड़ा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने National Testing Agency के अध्यक्ष Pradeep Joshi के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने संसदीय समिति के सामने कहा था कि वे पेपर लीक नहीं मानते। गहलोत ने कहा कि एक तरफ NTA कई जगहों पर री-एग्जाम और जांच की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके अध्यक्ष का ऐसा बयान विरोधाभासी है। उन्होंने जयपुर में कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों छात्र और अभिभावक सड़कों पर उतरे, लेकिन सरकार और प्रशासन अभी भी गंभीरता नहीं दिखा रहे।
‘बुलडोजर राजनीति’ पर भी उठाए सवाल
गहलोत ने भाजपा सरकारों की कथित ‘बुलडोजर नीति’ को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे मामलों में तुरंत कार्रवाई करने वाली सरकार NEET पेपर लीक मामले में चुप है क्योंकि इसमें भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में राजनीतिक संरक्षण मिलने की वजह से सख्त कार्रवाई नहीं हो रही।
राजस्थान की राजनीति में बढ़ी हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशोक गहलोत का यह हमला सिर्फ विपक्षी बयानबाजी नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। लगातार चार बड़े मुद्दों को उठाकर उन्होंने सरकार को सीधे जनता के सवालों के बीच खड़ा करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि भाजपा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इन आरोपों पर किस तरह का पलटवार करते हैं।
Author: manoj Gurjar
मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।








