सिद्धारमैया के इस्तीफे पर गरमाई सियासत,  बोम्मई बोले- OBC समाज के साथ विश्वासघात

कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंत्रियों के साथ अहम बैठक के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद बसवराज एस बोम्मई ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ओबीसी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री को हटाना पिछड़े वर्गों के साथ बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक तरफ ओबीसी हितों की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी ने अपने ओबीसी मुख्यमंत्री को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

“पिछड़ा वर्ग कांग्रेस से नाराज होगा”

बसवराज बोम्मई ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है। उनके मुताबिक, पिछड़ा वर्ग अब कांग्रेस से दूरी बना सकता है क्योंकि पार्टी ने अपने सबसे बड़े ओबीसी चेहरे को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए पिछड़े वर्गों के मुद्दे उठाती है, लेकिन जब नेतृत्व देने की बात आती है तो वही वर्ग सबसे पहले निशाने पर आ जाता है। बोम्मई ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया को कभी स्थिर तरीके से सरकार चलाने का मौका नहीं मिला। शुरुआत से ही सत्ता साझेदारी और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें चलती रहीं, जिससे सरकार अंदरूनी संघर्ष में उलझी रही।

ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद बढ़ी हलचल

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद राजनीतिक घटनाक्रम अचानक तेज हो गया। बैठक में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल हुए। इनमें प्रियंक खरगे, केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल और रामलिंगा रेड्डी जैसे बड़े नाम मौजूद रहे। बैठक के दौरान डीके शिवकुमार द्वारा सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की तस्वीर भी सामने आई, जिसे सत्ता परिवर्तन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला ले सकता है।

जातीय समीकरणों पर भी चर्चा तेज

सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय से आते हैं, जबकि डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राज्य में जातीय समीकरणों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब नए सामाजिक संतुलन के जरिए आगामी चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।

“सरकार अंदरूनी कलह में उलझी रही”

बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक विफलता के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकार विकास कार्यों के बजाय अंदरूनी खींचतान में उलझी रही। उनके मुताबिक राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सत्ता संघर्ष वाली राजनीति के कारण कर्नाटक विकास के मामले में कई साल पीछे चला गया है। बीजेपी अब इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में जुट गई है।

कांग्रेस की तरफ से अब तक आधिकारिक बयान नहीं

हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पार्टी हाईकमान की अगली बैठक के बाद ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजरें कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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