US-ईरान समझौते से तेल बाजार को राहत, क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

नई दिल्ली: पिछले कई महीनों से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा था। तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई थीं। लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए आधिकारिक शांति समझौते ने बाजार की दिशा बदल दी है। समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीदें फिर से मजबूत हो गई हैं।

होर्मुज मार्ग सामान्य होने से बाजार में लौटा भरोसा

वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले कुछ समय से तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। इससे तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी। अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत इस समुद्री मार्ग पर तेल और गैस की आवाजाही सामान्य करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही ईरान की कुछ प्रतिबंधित संपत्तियों को भी रिलीज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों का भरोसा लौटा और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

ब्रेंट और WTI दोनों में आई नरमी

शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.35 प्रतिशत टूटकर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी लगभग 2 प्रतिशत तक फिसल गया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों पर और दबाव बन सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी का सीधा असर घरेलू ईंधन लागत पर पड़ता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। गौरतलब है कि मई महीने में तेल कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से ईंधन के दाम बढ़ाए थे, जिसके बाद कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई थी। अब कच्चे तेल में नरमी के बाद उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि कंपनियां जल्द ही कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।

राजस्थान समेत कई राज्यों में महंगा है ईंधन

राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और केरल जैसे राज्यों में टैक्स संरचना के कारण पेट्रोल की कीमतें अभी भी देश में सबसे ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। जयपुर, हैदराबाद, पटना और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है।

क्या जल्द घटेंगे दाम?

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक-दो दिन की गिरावट के आधार पर तेल कंपनियां कीमतों में कटौती नहीं करतीं। यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे बनी रहती हैं और वैश्विक आपूर्ति स्थिर रहती है, तब पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका-ईरान समझौते का असर कितना स्थायी रहता है और आने वाले दिनों में तेल बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।

manoj Gurjar
Author: manoj Gurjar

मनोज गुर्जर पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और खेल, राजनीति और तकनीक जैसे विषयों पर विशेष रूप से लेखन करते आ रहे हैं। इन्होंने देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं को गहराई से कवर किया है और पाठकों तक तथ्यात्मक, त्वरित और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का काम किया है।

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